गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में आ चुके हैं. 2 जून तड़के 2 बजकर 25 मिनट पर गुरु का गोचर कर्क राशि में हुआ, जहां वे 31 अक्टूबर 2026 तक रहेगा. इसके बाद सिंह राशि में चले जाएंगे.
ज्योतिष में गुरु का कर्क राशि में आते ही देश-दुनिया और कई राशियों के जीवन में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है.
लेकिन चार राशियों के लिए यह समय काफी शुभ रहेगा. जानें इन राशियों के बारे में.
मेष राशि (Aries)- गुरु का गोचर आपकी राशि से चौथे भाव में हुआ है. यह भाव सुख, माता और वाहन का होता है. चतुर्थ भाव में गुरु उच्च का प्रभाव अधिकांश शुभ रहता है. इस समय पारिवारिक सुख बढ़ेगा. वाहन या नया मकान खरीद सकते हैं. करियर में भी तरक्की हो सकती है.
कर्क राशि (Cancer)- देव गुरु बृहस्पति का गोचर आपकी ही राशि पहले यानी लग्न भाव में हुआ है, जिससे 'हंस पंचमहापुरुष राजयोग' का निर्माण हुआ. इसलिए कर्क राशि वालों के लिए यह समय स्वर्णिम काल की तरह रहेगा. स्वास्थ्य और करियर के लिए यह समय बेहतर रहेगा.
कन्या राशि (Virgo)- आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में गुरु का गोचर हुआ है. यह भाव लाभ और आय का होता है. इस आपकी आमदनी के नए स्रोत खुलेंगे. निवेश का मुनाफा हो सकता है. नौकरीपेशा वालों के प्रमोशन के योग बन सकते हैं.
मीन राशि (Pisces)- देव गुरु बृहस्पति का गोचर आपकी राशि से पांचवें भाव में हुआ है. यह भाव संतान, शिक्षा और प्रेम से जुड़ा है. गुरु गोचर के बाद मीन राशि वाले विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा रहेगा. प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता बढ़ेगी. इस समय शेयर मार्केट, लॉटरी या पैतृक संपत्ति का लाभ हो सकता है.

