Hanuman ji story: सनातन धर्म में वीर हनुमान जी को परम बाल ब्रह्मचारी और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया को ब्रह्मचर्य का पाठ पढ़ाने वाले बजरंगबली का एक पुत्र भी था और शास्त्रों में उनकी एक शादी का भी उल्लेख मिलता है?
बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के विशेष अवसर पर हनुमान जी की पूजा का खास महत्व होता है. ऐसे में आज हम आपको हनुमान जी के जीवन से जुड़े एक ऐसे ही अनोखे और दिव्य रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. आइए जानते हैं हनुमान जी के पुत्र और उनकी पत्नी से जुड़ी पौराणिक कथा, साथ ही इस दिन किए जाने वाले विशेष मंत्र और उपाय.
Hanuman Ji Son: ब्रह्मचारी और पुत्र? कैसे हुआ यह चमत्कार? हनुमान जी ने जीवनभर ब्रह्मचर्य का पालन किया. ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिना विवाह और गृहस्थ जीवन के उनके पुत्र का जन्म कैसे हुआ? इसके पीछे रामायण काल की एक बेहद रोचक और दिव्य कथा है, जो लंका दहन से जुड़ी हुई है.
जब जल उठी सोने की लंका
पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी ने माता सीता की खोज में प्रभु श्रीराम की कृपा से पूरी लंका को अपनी पूंछ से जला दिया, तो लंका धू-धू कर जल उठी. इस तीव्र अग्नि के कारण हनुमान जी को भयानक गर्मी लगी और वे पसीने से पूरी तरह तरबतर हो गए.
समुद्र में गिरी पसीने की एक बूंद
अग्नि को शांत करने और खुद को ठंडा करने के लिए हनुमान जी समुद्र के ऊपर पहुंचे. तभी उनके शरीर से पसीने की एक बड़ी और दिव्य बूंद टपक कर सीधे समुद्र के पानी में गिरी. उसी समय वहां मौजूद एक विशाल मछली ने उस बूंद को अपने मुंह में ले लिया.
मछली बनी मां, गर्भ में पलने लगा जीव
उस पसीने की बूंद को निगलते ही वह मछली गर्भवती हो गई. दरअसल, वह कोई साधारण मछली नहीं थी, बल्कि एक अप्सरा थी जिसे एक श्राप के कारण मछली बनना पड़ा था. इस तरह हनुमान जी के तेज और पसीने की बूंद से उस मछली के गर्भ में एक बालक का जन्म हुआ.
क्या था हनुमान जी के पुत्र का नाम?
जब पाताल लोक के राजा अहिरावण के सैनिकों ने उस विशाल मछली को पकड़ा और उसका पेट चीरा, तो उसके भीतर से एक वानर जैसी पूंछ वाला बेहद शक्तिशाली बालक निकला.
- पुत्र का नाम: इस अद्भुत बालक का नाम मकरध्वज रखा गया.
- मकरध्वज की विशेषता: मकरध्वज के पास हनुमान जी जैसी ही शक्ति और वानर रूप था, जिसके कारण वे हनुमान जी के पुत्र कहलाए.
पाताल लोक में पिता-पुत्र का महासंग्राम
रामायण के युद्ध के दौरान जब अहिरावण ने छल से प्रभु राम और लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक में बंदी बना लिया, तब हनुमान जी उन्हें मुक्त कराने पाताल पहुंचे. वहां द्वारपाल के रूप में खड़े मकरध्वज ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. उस समय पिता और पुत्र के बीच अपनी-अपनी स्वामिभक्ति और कर्तव्य को लेकर भीषण युद्ध हुआ था.
क्या बजरंगबली ने किया था विवाह? जानें पत्नी का नाम
शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी का एक विवाह भी हुआ था. सूर्य देव को हनुमान जी का गुरु माना जाता है. हनुमान जी को सूर्य देव से नौ दिव्य विद्याएं सीखनी थीं, जिनमें से 5 विद्याएं तो उन्होंने सीख लीं, लेकिन बाकी की 4 विद्याएं केवल एक विवाहित पुरुष ही सीख सकता था.
सूर्यपुत्री सुवर्चला से विवाह: सृष्टि के नियम और विद्या की पूर्णता के लिए हनुमान जी को सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला से विवाह करना पड़ा.
विवाह के बाद भी क्यों कहलाए परम ब्रह्मचारी?
विवाह के तुरंत बाद ही सुवर्चला वापस अपनी तपस्या में लीन हो गईं और हनुमान जी ने अपनी बची हुई विद्याएं ग्रहण कीं. हनुमान जी ने कभी भी गृहस्थ जीवन नहीं जिया और न ही शारीरिक संबंध बनाए. वे सदैव तपस्वी और मर्यादा के मार्ग पर रहे, इसीलिए विवाह के बाद भी उन्हें हमेशा परम बाल ब्रह्मचारी ही पूजा जाता है.
बड़ा मंगल पर संकटों से मुक्ति के अचूक उपाय
अगर आपके जीवन में परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, तो मंगलवार या बुढ़वा मंगल के दिन ये विशेष उपाय जरूर करें:
चमेली के तेल का चोला: मंगलवार के दिन हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं. इससे सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं.
पीपल के पत्ते का उपाय: 11 पीपल के पत्ते लें, उन पर साफ सिंदूर या चंदन से 'श्री राम' लिखें और इसकी माला बनाकर हनुमान जी को पहनाएं. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है.
बूंदी का प्रसाद: इस दिन हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और इसे गरीबों में बांटें. इससे कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होता है.
इन मंत्रों के जाप से दूर होगा हर संकट
मंगलवार की पूजा के दौरान हनुमान जी के इन प्रभावशाली मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से करें:
- सर्व संकट मुक्ति मंत्र: ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा.
- मारुति नंदन मंत्र: अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्. सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
- छोटा और प्रभावशाली मंत्र: ॐ हं हनुमते नमः.
हनुमान जी और उनके प्रतापी पुत्र मकरध्वज की यह दिव्य कथा हमें सिखाती है कि जीवन में कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा का क्या महत्व है.
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Author : हर्षिका मिश्रा

