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कौन लेता है ITR फाइलिंग की डेट बढ़ाने का फैसला, क्या PM देते हैं दखल?

कौन लेता है ITR फाइलिंग की डेट बढ़ाने का फैसला, क्या PM देते हैं दखल?

Income Tax Return 2026: केंद्र सरकार ने उन योग्य व्यक्तियों को राहत दी है जिनकी इनकम बिजनेस या फिर पेशे से होती है और जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है. इनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की समय सीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी गई है.

इस समय सीमा में बढ़ोतरी का फायदा मुख्य रूप से ITR-3 और ITR-4 भरने वाले टैक्सपेयर्स को मिलता है. जब भी आईटीआर की समय सीमा बढ़ाई जाती है तो अक्सर एक सवाल उठता है कि आखिर समय सीमा बढ़ाने का फैसला कौन करता है? क्या यह प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री या फिर इनकम टैक्स विभाग करता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.‌

आईटीआर की समय सीमा बढ़ाने का आखिरी अधिकार

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की समय सीमा बढ़ाने का फैसला सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस लेता है. यह इनकम टैक्स विभाग की सबसे बड़ी पॉलिसी बनाने वाली संस्था है. जब भी समय सीमा बढ़ाने की मंजूरी दी जाती है तो सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करता है. इसमें नई समय सीमा और राहत पाने के योग्य टैक्सपेयर्स की कैटेगरी बताई जाती है. बोर्ड इनकम टैक्स एक्ट 1961 से मिले अधिकारों के तहत यह काम करता है. इससे वह ऐसे फैसलों के लिए आखिरी प्रशासनिक संस्था बन जाता है.

समय सीमा बढ़ाने में प्रधानमंत्री का दखल

प्रधानमंत्री सीधे तौर पर इनकम टैक्स रिटर्न भरने की समय सीमा बढ़ाने का फैसला या फिर घोषणा नहीं करते. समय सीमा बढ़ाना एक प्रशासनिक और तकनीकी फैसला माना जाता है. इसे वित्त मंत्रालय सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के जरिए संभालता है. हालांकि प्रधानमंत्री सरकार की बड़ी आर्थिक और टैक्स नीति को बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं लेकिन टैक्स भरने की समय सीमा में बदलाव जैसे रोजमर्रा के प्रशासनिक मामले रेवेन्यू विभाग और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

वित्त मंत्रालय क्या भूमिका निभाता है?

हालांकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस आखरी नोटिफिकेशन जारी करता है लेकिन वह वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू विभाग के तहत काम करता है. किसी भी समय सीमा को बढ़ाने से पहले मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूदा हालात की समीक्षा करते हैं. साथ ही यह देखते हैं कि क्या टैक्स पेयर को सच में कोई परेशानी हो रही है. जब वित्त मंत्रालय से प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी मिल जाती है तो सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस औपचारिक रूप से नई समय सीमा की घोषणा करता है.

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सरकार समय सीमा बढ़ाने की घोषणा कब करती है?

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस हर साल आईटीआर भरने की समय सीमा नहीं बढ़ाता है. समय सीमा आमतौर पर तभी बढ़ाई जाती है जब कोई ऐसा धारण स्थिति टैक्सपेयर्स की समय पर रिटर्न भरने की क्षमता पर असर डालती है. आम वजहों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-फाइलिंग पोर्टल पर तकनीकी दिक्कत, फाइलिंग के आखिरी कुछ दिनों में सर्वर पर काफी ज्यादा ट्रैफिक, इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म या फिर फाइलिंग यूटिलिटी में बड़े बदलाव, बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा और कोरोना महामारी जैसी देशव्यापी इमरजेंसी शामिल हैं.

बोर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट, आईसीएआई जैसी प्रोफेशनल संस्था और ट्रेड संगठन की बातों पर भी विचार करता है. खासकर तब जब वे टैक्सपेयर्स को होने वाली आम व्यावहारिक दिक्कतों की तरफ इशारा करते हैं.

किस कानून के तहत CBDT ड्यू डेट बढ़ा सकता है?

CBDT को इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 119 से अधिकार मिलता है. यह प्रावधान बोर्ड को आदेश, सर्कुलर और नोटिफिकेशन जारी करने का अधिकार देता है. ऐसा इसलिए ताकि टैक्स पेयर्स को होने वाली वास्तविक मुश्किलों को दूर करने के लिए डेडलाइन या फिर प्रक्रियात्मक जरूरतों में ढील दी जा सके. इस कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करके, CBDT टैक्सपेयर्स की खास कैटेगरी के लिए या फिर असाधारण स्थितियों में देशभर के सभी योग्य टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर की ड्यू डेट बढ़ा सकता है.

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Author : स्पर्श गोयल

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