Drugs Addiction In India: देश में नशे के बढ़ते कारोबार और युवा पीढ़ी पर पड़ रहे इसके घातक असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 हफ्तों तक चलने वाले 'नशा मुक्त युवा' मूवमेंट की शुरुआत की, जो देश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
यह पहल बेहद जरूरी हो गई है क्योंकि अवैध नशा न केवल युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर रहा है, बल्कि लगातार जाने भी ले रहा है.
हाईटेक होते इस दौर में तस्करों ने डिलीवरी के लिए ड्रोन और पार्सल सेवा का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत में करोड़ों लोग अलग-अलग प्रकार के नशे की गिरफ्त में हैं और पड़ोसी देशों के रास्तों से बड़े पैमाने पर अवैध नशे की खेप देश के अंदर पहुंचाई जा रही है.
देश में हर रोज नशे से जान गंवा रहे युवा
नशे की लत आज के समय में देश के युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आई है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 के दौरान नशीले पदार्थों और शराब की लत की वजह से कुल 13,955 लोगों की जान चली गई थी. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 12,977 मौतें नशे की वजह से हुआ मानसिक तनाव और लत के चलते की गई आत्महत्याओं से हुई थीं. इसके अलावा 978 लोगों की मौत सीधे तौर पर बहुत अधिक नशा करने यानी ड्रग ओवरडोज के कारण हुई. आंकड़े साफ बताते हैं कि देश में औसतन हर 35 से 40 युवाओं में से एक की जान नशे के भयानक दुष्परिणामों के कारण जा रही है.
भारत में कितनी बड़ी है नशेड़ियों की फौज?
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2025 की सालाना रिपोर्ट भारत में नशे की भयावह तस्वीर पेश करती है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में 3.1 करोड़ से अधिक लोग कैनबीज यानी गांजा, भांग और हशीश का इस्तेमाल करते हैं. वहीं 2.3 करोड़ से ज्यादा नागरिक अफीम और हेरोइन जैसे खतरनाक ओपियोइड्स के आदी हैं. इसके अलावा 1.18 करोड़ लोग सिंथेटिक ड्रग्स और गोलियों का सेवन कर रहे हैं. फीसदी के हिसाब से देखें तो भारत की लगभग 4% आबादी कैनबीज और 3% आबादी अफीम के नशे में जकड़ी हुई है. इन नशीले पदार्थों से अलग देश में 16 करोड़ से अधिक लोग शराब का सेवन भी करते हैं.

अवैध नशे के भारत में कितने रास्ते?
गोल्डन क्रिसेंट
भारत में अवैध नशे की आवक दो मुख्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व जमीनी रास्तों से होती है. इनमें से पहला है 'गोल्डन क्रिसेंट', जिसे सरकार 'डेथ क्रिसेंट' भी कहती है. भारत के पश्चिम में स्थित इस क्षेत्र में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान आते हैं. अफगानिस्तान में तालिबान के अफीम पर रोक लगाने के बावजूद वहां पहले से मौजूद 13,200 टन अफीम का विशाल स्टॉक लगातार सप्लाई किया जा रहा है. पाकिस्तान की सीमा से जुड़े होने के कारण पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. साल 2025 में NCB ने देशभर से 3,567 किलो हेरोइन जब्त की, जिसमें से 58 फीसदी यानी अकेले 2,086 किलो हेरोइन पंजाब में पकड़ी गई थी.
'गोल्डन ट्राएंगल' और म्यांमार का नेटवर्क
दूसरा प्रमुख मार्ग भारत के पूर्व में स्थित 'गोल्डन ट्राएंगल' है, जिसे 'डेथ ट्राएंगल' के नाम से भी जाना जाता है. इसमें म्यांमार, थाईलैंड और लाओस शामिल हैं, जहां से मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स भेजे जाते हैं. साल 2024 में अकेले म्यांमार में 995 टन मेथामफेटामाइन का भारी उत्पादन हुआ, जिससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी तस्करी बढ़ गई. NCB ने 2025 में कुल 3,485 किलो एटीएस जब्त किया, जिसमें से 42% यानी 1,477 किलो माल अकेले मिजोरम से मिला. इसके अलावा मणिपुर से 535 किलो, राजधानी दिल्ली से 454 किलो और गुजरात से 308 किलो ड्रग्स पकड़ा गया.
ड्रोन और पार्सल से डिलीवरी का नया पैंतरा
तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान सीमा से लगने वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए नशा गिराने की घटनाएं सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं. पिछले साल ड्रोन से तस्करी के 305 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 408 किलो नशीले पदार्थ की सप्लाई हुई थी. यह आंकड़ा साल 2024 के मुकाबले 98% अधिक है. अकेले पंजाब में ड्रोन डिलीवरी के 298 मामले सामने आए, जिनमें 461 किलो माल भेजा गया. हालांकि, कूरियर और पार्सल के जरिए होने वाली सप्लाई में थोड़ी कमी आई है; जहां 2021 में 250 मामलों में 1,557 किलो माल मिला था, वहीं 2025 में 174 मामलों में 972 किलो ड्रग्स बरामद हुई.

करोड़ों की जब्ती और हजारों गिरफ्तारियां
ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चला रही हैं. NCB की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में देशभर के अंदर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े 1,48,063 आपराधिक मामले दर्ज किए गए. इन कार्यवाइयों के तहत कुल 1,83,675 तस्करों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 747 विदेशी नागरिक भी शामिल थे. पुलिस और एजेंसियों ने पूरे साल में 12,409 क्विंटल नशीली सामग्री जब्त की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 18,227 करोड़ रुपये थी. हालांकि यह आंकड़ा 2024 की तुलना में कम था, जब एजेंसियों ने 27,524 करोड़ रुपये मूल्य का 13,306 क्विंटल माल पकड़ा था.
Author : निधि पाल

