उत्तर प्रदेश में शुरुआत में कई किसानों ने खेत में तालाब बनाकर मोती की खेती की शुरू की. जिसके बाद कई और किसान भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अपनी पारंपरिक खेती जारी रखते हुए खेत के एक छोटे हिस्से में तालाब बनाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं.
अगर तालाब में करीब 1000 सीप डाली जाए और उनमें से 600 से 700 सीप भी तरीके से मोती तैयार कर दे, तो किसान लागत से कई गुना मुनाफा कमा सकते हैं.
मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार कई योजनाएं चल रही है. उत्तर प्रदेश में पर्ल फार्मिंग प्रोजेक्ट के तहत कुल लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. वहीं मत्स्य संपदा योजना और नीली क्रांति योजना के तहत भी किसानों को अनुदान का लाभ मिल रहा है.
इसके अलावा कुछ मामलों में किसानों को लाखों रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है. इन सबके अलावा खेत तालाब योजना के तहत किसानों को तालाब निर्माण पर भी सब्सिडी मिलती है, जिससे वह मोती की खेती मछली पालन और दूसरी जलीय गतिविधियां आसानी से शुरू कर सकते हैं.
मोती की खेती एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, इसमें सीप के अंदर छोटा सा बीज डाला जाता है. इसके बाद सीप को तालाब में जालीदार बैग में रखकर पानी के अंदर लटकाया जाता है. करीब 8 से 18 महीने के दौरान सीप के अंदर परतें बनती है और धीरे-धीरे चमकदार मोती तैयार हो जाते हैं. इस दौरान सीप की नियमित निगरानी और सही तापमान बनाए रखना बहुत जरूरी होता है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार एक सीप की शुरुआती कीमत करीब 30 से 35 रुपये होती है, जो तैयार होने के बाद 150 से 200 रुपये तक बिक सकती है. अगर कोई किसान हजारों सीप तालाब में डालता है तो एक से डेढ़ साल में लाखों रुपये की आमदनी संभव है. कुछ मामलों में एक एकड़ के तालाब से 10 से 12 लाख रुपये तक की कमाई भी की जा सकती है.
जिसमें खर्च निकालने के बाद अच्छा को मुनाफा बचता है. वहीं कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि मोती की खेती को मछली पालन के साथ जोड़कर किसान अपनी आय चार से पांच गुना तक बढ़ा सकते हैं. इससे एक ही तालाब में दो तरह की कमाई का मौका मिलता है.

