Flight Baggage Delay: केरल के पालक्काड जिला उपभोक्ता आयोग ने यात्री का चेक-इन बैगेज तीन दिन की देरी से पहुंचाने पर एक निजी एयरलाइन को सेवा में कमी का दोषी ठहराया. आयोग ने एयरलाइन को 8,923 रुपये का खर्च लौटाने, 20,000 रुपये मुआवजा, 15,000 रुपये अतिरिक्त क्षतिपूर्ति और 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया.
आयोग ने कहा कि शिकायत के बावजूद एयरलाइन ने नियमों के अनुसार मुआवजा नहीं दिया और सुनवाई में भी शामिल नहीं हुई, जो सेवा में स्पष्ट लापरवाही है.
तीन दिन की देरी से मिला सामान
शिकायतकर्ता का चेक-इन बैगेज कोयंबटूर पहुंचने के तीन दिन बाद मिला. इस दौरान उसे जरूरी सामान खरीदने पर 8,923 रुपये खर्च करने पड़े. एयरलाइन से मुआवजा न मिलने पर उसने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की. सुनवाई में एयरलाइन शामिल नहीं हुई, जिसके बाद आयोग ने एकतरफा फैसला शिकायतकर्ता के पक्ष में सुनाया.
एयरलाइन ने देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभाई: आयोग
आयोग ने माना कि एयरलाइन ने शिकायतकर्ता का बैगेज तीन दिन की देरी से पहुंचाया और नियमों के अनुसार मुआवजा भी नहीं दिया. इसे सेवा में लापरवाही और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना गया.
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि नोटिस मिलने के बावजूद एयरलाइन ने न तो सुनवाई में हिस्सा लिया और न ही अपना पक्ष रखा. इसलिए मुआवजा रोकने का कोई वैध कारण सामने नहीं आया और शिकायतकर्ता के दावों को सही माना गया.
इस फैसले ने स्पष्ट किया है कि बैगेज में देरी होने पर एयरलाइंस नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पैसेंजर चार्टर के तहत अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकतीं. आयोग ने कहा कि देरी से सामान मिलने पर यात्रियों को हुए खर्च और असुविधा के लिए मुआवजा पाने का अधिकार है. यदि एयरलाइन इन नियमों का पालन नहीं करती, तो इसे उपभोक्ता कानून के तहत सेवा में कमी माना जाएगा.
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Author : एबीपी यूटिलिटी डेस्क

