RBI MPC Meet: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 5 अगस्त 2026 को अपनी नई पॉलिसी का ऐलान करते हुए रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. ऐसे में अब सवाल आता है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले निवेशकों पर इस फैसले का क्या असर होगा?
क्या बैंक में उनकी कराई गई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरें बढ़ेंगी?
बता दें कि रेपो रेट में बदलाव सीधे तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दिशा तय करता है. चूंकि रिजर्व बैंक ने इस बार रेपो रेट को स्थिर रखा है इसलिए निकट भविष्य में एफडी दरों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. यानी कि यह एफडी पर मौजूदा उच्च ब्याज दरों का फायदा उठाने का एक बेहतरीन मौका है. इस वक्त कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक सीनियर सिटीजेंस को 8.24% से 8.50% तक और कमर्शियल बैंक 7.10% से 7.30% के आकर्षक दरों पर ब्याज दे रहे हैं.
रेट बढ़ने पर क्या होता है?
अगर आज आरबीआई रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के बजाय इसमें 25 या 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करता, तो बैंक भी कुछ ही हफ्तों के भीतर एफडी पर ब्याज दरें बढ़ा देते. चूंकि सामान्य नागरिकों के मुकाबले सीनियर सिटीजेंस को 0.50% से 0.75% अतिरिक्त ब्याज मिलता है इसलिए रेपो रेट बढ़ने से उनकी जमा पूंजी पर भी बड़ा असर पड़ता. इससे उनकी मासिक कमाई भी बढ़ जाती.
इसके उलट, रेपो रेट कम होने पर बैंक एफडी पर ब्याज दरें कम करने लगते हैं. ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को पॉलिसी रिन्यूअल कराने पर भी कम ब्याज मिलता है, जिसका उनकी आय पर असर पड़ता है.
जून की बैठक में क्या हुआ था?
जून में हुई MPC की बैठक में भी रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था. दिसंबर 2025 से आरबीआई ने अपनी बेंचमार्क रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. अकेले RBI ही नहीं, बल्कि US फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान जैसे कई केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर ही रखा है.
रिजर्व बैंक ने Repo Rate पर लिया बड़ा फैसला, 5.25% बरकरार, अब नहीं बढ़ेगी EMI
Author : अरिजीता सेन

