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Xप्लेन: दतिया की सियासत में मौजूद दिग्विजय सिंह! क्या अब भी प्रासंगिक कांग्रेस के 'बुजुर्ग'?

Xप्लेन: दतिया की सियासत में मौजूद दिग्विजय सिंह! क्या अब भी प्रासंगिक कांग्रेस के 'बुजुर्ग'?

राज्यसभा की सीट खाली करने के ऐलान के बाद से दिग्विजय सिंह को लेकर एक धारणा बन गई थी कि शायद अब उनकी राजनीतिक हैसियत घट गई है. कांग्रेस ने उन्हें 'साइडलाइन' कर दिया है, लेकिन दतिया उपचुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया कि दिग्विजय सिंह अभी भी मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र में हैं.

दिग्गी के साथ मंच साझा कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खुद उन्हें 'मार्गदर्शक' और 'वरिष्ठ नेता' कहा. तो आखिर क्या है दतिया विजय की 'दिग्गी कहानी'...

दिग्विजय के राज्यसभा छोड़ने से कहानी की शुरुआत कैसे?

13 जनवरी 2026 को दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा ऐलान किया कि वे अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहे हैं. दिग्गी का मौजूदा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को खत्म हो रहा था और उन्होंने तीसरी बार राज्यसभा जाने से साफ इनकार कर दिया.

दिग्गी ने साफ कहा, 'मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं.' यह फैसला उनका खुद का है. दिग्गी ने संकेत दिए कि वे अब मध्य प्रदेश की राजनीति और संगठन को मजबूत करने पर फोकस करेंगे.

24 जून 2026 को जब उनका 12 साल का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हुआ, तो एक आंकड़ा सामने आया कि उन्होंने 1,010 सवाल संसद में उठाए. राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, किसान और सामाजिक कल्याण समेत हर मुद्दे पर उन्होंने अपनी बात रखी. वे गृह, वित्त, कॉर्पोरेट मामलों और शहरी विकास की संसदीय समितियों के सदस्य रहे. शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल समिति के अध्यक्ष भी रहे.

यानी, वे कोई औसत सांसद नहीं थे. उन्होंने संसद में सक्रिय भूमिका निभाई.

क्या कांग्रेस ने उन्हें 'साइडलाइन' किया?

यहां मामला थोड़ा उलझा हुआ है. एक तरफ दिग्विजय सिंह ने खुद राज्यसभा न जाने का फैसला किया, लेकिन दूसरी तरफ जून 2026 में कांग्रेस ने अपनी राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी की. इसमें दिग्विजय सिंह इकलौते मौजूदा सांसद थे, जिन्हें टिकट नहीं दिया गया. इस लिस्ट में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी की करीबी मीनाक्षी नटराजन, प्रवीण चक्रवर्ती, प्रणव झा, नीरज डांगी, मंसूर अली खान और पवन खेड़ा जैसे नाम शामिल थे.

हालांकि, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस धारणा को खारिज करते हुए कहा, 'मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में किसी के लिए भी दिग्विजय सिंह को साइडलाइन करना नामुमकिन है.'

मामला और गर्म तब हो गया जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया. दिग्विजय सिंह ने इसे 'मिलीभगत की चोरी' करार दिया और आरोप लगाया कि जब चोरी होती है तो हर कोई शामिल होता है. राज्य सरकार, केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुझे कहने को मजबूर होना पड़ रहा है, सुप्रीम कोर्ट भी...

इस बयान ने बीजेपी को मौका दे दिया. मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को 'चोर' कहना न्यायपालिका का अपमान है.

दतिया उपचुनाव: जब दिग्विजय और जीतू साथ आए

दिग्विजय सिंह की राजनीतिक प्रासंगिकता की असली परीक्षा दतिया विधानसभा उपचुनाव में हुई. यह सीट 2 अप्रैल 2026 को राजेंद्र भारती की अयोग्यता के बाद खाली हुई थी.

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 13 जुलाई 2026 को दावा किया, 'कांग्रेस यह सीट 25,000 वोटों से जीतेगी.' पटवारी ने इसे मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव का मोड़ बताया था. पटवारी ने यह भी कहा, 'आज मध्य प्रदेश की राजनीति बदलने की शुरुआत है... दतिया की जनता जिस तरह प्रतिक्रिया दे रही है, उसके अनुसार मुझे विश्वास है कि कांग्रेस यह सीट 25,000 वोटों से जीतेगी.'

एक वीडियो ने पार्टी में फूट का राग सुना दिया

दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच एक और मामला चर्चा में रहा. 9 जून 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी दिग्विजय सिंह को अपनी सीट से हटने के लिए कहते दिखे. दिग्विजय सिंह उठकर एक तरफ की कुर्सी पर जा बैठे.

बीजेपी ने इस वीडियो को पार्टी में आंतरिक कलह का सबूत बताया. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को इस तरह अपमानित नहीं करना चाहिए. हालांकि, जीतू पटवारी ने इससे इनकार किया. पटवारी ने कहा, 'मैंने उन्हें नहीं हटाया. दिग्विजय सिंह जी हमारे वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक हैं. पटवारी का कहना था कि सीटिंग एडजस्टमेंट इसलिए किया गया ताकि हरीश चौधरी मीनाक्षी नटराजन के बगल में बैठ सकें.

दिग्विजय सिंह का अभियान में बड़ा रोल

दिग्विजय सिंह ने पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई. 4 जुलाई 2026 को जब कांग्रेस ने औपचारिक रूप से दतिया अभियान की शुरुआत की, तो जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह ने मिलकर बीजेपी पर हमला बोला. प्रचार के आखिरी दिन भी दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से वोट मांगे.

3 अगस्त 2026 को दतिया उपचुनाव के नतीजे आए और कांग्रेस ने यह सीट जीत ली. जीत के बाद जीतू पटवारी ने कहा, 'दतिया ने बदलाव का शंखनाद किया है. अहंकार, भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और द्वेष की राजनीति को जनता स्वीकार नहीं करती.'

दिग्विजय सिंह ने भी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए अहंकार को हार की वजह बताया.

लेकिन इनके बीच दिग्विजय सिंह का 'साइडलाइन' होने से क्या ताल्लुक?

दिग्विजय सिंह को राज्यसभा का टिकट नहीं मिला और कुछ वीडियो ने पार्टी में खींचतान की झलक दी, लेकिन दतिया उपचुनाव ने साबित कर दिया कि दिग्विजय सिंह अभी भी मध्य प्रदेश कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं.

  • दिग्गी ने पूरा चुनाव अभियान संभाला.
  • जीतू पटवारी ने उन्हें सार्वजनिक रूप से 'वरिष्ठ नेता और मार्गदर्शक' कहा.
  • पीसी शर्मा ने साफ कहा, 'किसी के लिए भी दिग्विजय सिंह को साइडलाइन करना नामुमकिन है.'
  • दतिया की जीत में उनकी अहम भूमिका को सभी ने स्वीकार किया.

जीतू पटवारी की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने दतिया में जीत हासिल की और इस जीत का श्रेय दिग्विजय सिंह को भी जाता है. यानी दोनों नेताओं ने मिलकर पार्टी को जीत दिलाई, भले ही बीच-बीच में तनाव की झलक मिली हो.

एक बात तो तय है कि दिग्विजय सिंह अभी भी 'प्रासंगिक' हैं और मध्य प्रदेश की सियासत में उनकी मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

Author : ज़ाहिद अहमद

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: ABP Live Hindi