Z vs Z+ Security: हाल ही में दो बड़े नेताओं नीतीश कुमार और राघव चड्ढा को अलग-अलग स्तर की वीआईपी सुरक्षा दी गई है. जहां नीतीश कुमार को अब Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई है, वहीं राघव चड्ढा को Z श्रेणी की सुरक्षा मिली है.
आइए जानते हैं कि यह दोनों सुरक्षा एक दूसरे से कैसे अलग है.
Z और Z+ सुरक्षा में अंतर
भारत में VIP सुरक्षा का फैसला गृह मंत्रालय द्वारा खुफिया एजेंसियों द्वारा तैयार की गई खतरे की आशंका वाली रिपोर्टों के आधार पर किया जाता है. सबसे साफ अंतर तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या में होता है. Z+ सुरक्षा भारत में सुरक्षा के सबसे उच्चतम स्तरों में से एक है. इसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं. इनमें 10 से ज्यादा विशिष्ट कमांडो भी होते हैं. इसकी तुलना में Z श्रेणी की सुरक्षा में लगभग 22 सुरक्षाकर्मी होते हैं और कमांडो की संख्या कम होती है.
तैनात कमांडो और बलों के प्रकार
Z+ सुरक्षा में अक्सर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कमांडो शामिल होते हैं. इन्हें ब्लैक कैट्स के नाम से जाना जाता है. ये आतंकवाद रोधी अभियान और उच्च जोखिम वाली सुरक्षा में स्पेशलाइज्ड होते हैं. इसके उलट Z श्रेणी की सुरक्षा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, CISF या ITBP जैसे अर्धसैनिक बलों पर निर्भर करती है.
काफिला और यात्रा सुरक्षा प्रोटोकॉल
नितेश कुमार जैसे Z+ सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के लिए काफिला बड़ा और काफी ज्यादा एडवांस्ड होता है. इसमें आमतौर पर 5 से 6 वाहन शामिल होते हैं. इनमें बुलेट प्रूफ कार, पायलट वाहन और जैमर युक्त इकाई शामिल होती हैं. राघव चड्ढा का Z सुरक्षा काफिला छोटा होता है. यह आमतौर पर एक एस्कॉर्ट वाहन और कुछ सहायक इकाइयों तक ही सीमित होता है.
इसी के साथ Z+ सुरक्षा में यात्रा से पहले विस्तृत जांच शामिल होती है. इन्हें उन्नत सुरक्षा संपर्क के रूप में जाना जाता है. वीआईपी के पहुंचने से पहले सुरक्षा दल रास्तों, स्थलों और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करते हैं. Z श्रेणी में ऐसी जांच सिर्फ उच्च जोखिम वाली या फिर संवेदनशील यात्रा के दौरान ही की जाती है. Z+ सुरक्षा सबसे खास एसपीजी सुरक्षा से ठीक नीचे आती है. इससे यह भारत की सबसे पूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक बन जाती है. Z श्रेणी की सुरक्षा भी काफी मजबूत होती है लेकिन सुरक्षा की गंभीरता और तैयारी के मामले में यह Z+ से एक पायदान नीचे आती है.
Author : स्पर्श गोयल

