उत्तर भारत में लगातार बढ़ती गर्मी और हीट वेव के खतरे को देखते हुए लखनऊ नगर निगम ने आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में विशेष 'कूलिंग पॉइंट' स्थापित करने की शुरुआत की है।
इसी क्रम में विधानसभा के निकट जीपीओ परिसर के पास बनाए गए नए कूलिंग पॉइंट का उद्घाटन महापौर सुषमा खर्कवाल ने किया। इस अवसर पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
नगर निगम का कहना है कि इन कूलिंग पॉइंट्स का उद्देश्य सड़क पर काम करने वाले श्रमिकों, रिक्शा चालकों, डिलीवरी कर्मियों, राहगीरों और अन्य जरूरतमंद लोगों को तेज गर्मी से राहत प्रदान करना है।
नगर निगम पहले ही पॉलीटेक्निक चौराहा, कुर्सी रोड स्थित सृष्टि अपार्टमेंट, 1090 चौराहा और लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय सहित कई प्रमुख स्थानों पर कूलिंग पॉइंट संचालित कर चुका है। इसके अलावा गोमतीनगर के पत्रकारपुरम चौराहा, जीएसटी भवन और अन्य व्यस्त क्षेत्रों में भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव के अनुसार इन कूलिंग पॉइंट्स की खासियत उनका पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन है। संरचना की दीवारें और छत मिट्टी तथा जूट जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाई गई हैं, जिससे अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी कम बना रहता है। यह व्यवस्था बिना अत्यधिक ऊर्जा खर्च किए लोगों को ठंडा वातावरण उपलब्ध कराती है।
इन राहत केंद्रों पर लोगों के लिए बैठने और विश्राम करने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यहां बेड, सोफा, कुर्सियां, पंखे, कूलर, मटकों में ठंडा पेयजल और ऊर्जा के लिए गुड़ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नगर निगम का मानना है कि दोपहर के समय यह व्यवस्था विशेष रूप से श्रमिक वर्ग के लिए उपयोगी साबित होगी।
गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए नगर निगम द्वारा संचालित 24 रैनबसेरों को भी हीट वेव राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां पहले से मौजूद बेड सुविधा के साथ स्वच्छ और ठंडे पेयजल की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, ताकि लोग कुछ समय आराम कर सकें और लू के खतरे से बच सकें।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि जलकल विभाग के सहयोग से शहर के 150 से अधिक स्थानों पर कैनोपी लगाकर शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों पर राहगीरों और श्रमिकों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
गर्मी से बचाव पर नगर निगम का फोकस
नगर निगम का लक्ष्य केवल अस्थायी राहत देना नहीं, बल्कि हीट वेव के प्रभाव को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं विकसित करना है। प्रशासन का मानना है कि बढ़ते तापमान के बीच इस तरह की पहल शहरवासियों के लिए राहत का बड़ा सहारा साबित होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करेगी।

