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UP में ग्रीन मोबिलिटी को रफ्तार, पब्लिक EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में देश में तीसरे नंबर पर पहुंचा प्रदेश

APN News 1 week ago

त्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार अब केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ चार्जिंग नेटवर्क को भी तेजी से मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 17.67 लाख इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पंजीकृत हो चुके हैं।

वहीं पब्लिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में उत्तर प्रदेश (UP) देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग सुविधाओं का यह विस्तार राज्य में परिवहन व्यवस्था को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

17.67 लाख ईवी का पंजीकरण, बढ़ रहा लोगों का भरोसा

प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक दोपहिया और चार पहिया वाहनों के साथ विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल अब शहरों में तेजी से दिखाई दे रहा है। 17.67 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर स्वीकार्यता बढ़ रही है।

ईवी की बढ़ती संख्या के साथ सबसे बड़ी जरूरत भरोसेमंद चार्जिंग नेटवर्क की होती है। चार्जिंग स्टेशन आसानी से उपलब्ध होने पर वाहन चालकों को बैटरी खत्म होने की चिंता कम होती है और लंबी दूरी की यात्रा में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल का भरोसा बढ़ता है।

चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से ईवी को मिलेगा और बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में पब्लिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। प्रमुख शहरों के अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों पर चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बेहतर इकोसिस्टम तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त और सुलभ चार्जिंग नेटवर्क बेहद जरूरी है। चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार होने से मौजूदा ईवी उपयोगकर्ताओं को सुविधा मिलेगी और नए खरीदारों के बीच भी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने का भरोसा मजबूत होगा।

पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने में मदद

इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल का सीधा असर परिवहन क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के प्रयासों पर पड़ सकता है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में चलने वाले ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पारंपरिक ईंधन आधारित परिवहन के विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं।

हालांकि, ईवी से पर्यावरणीय लाभ इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि इस्तेमाल होने वाली बिजली किस स्रोत से आती है। इसके बावजूद परिवहन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन की प्रत्यक्ष खपत घटाना ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

शहरों से हाईवे तक चार्जिंग सुविधा बढ़ाने की तैयारी

ईवी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए केवल वाहनों की बिक्री बढ़ना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए चार्जिंग स्टेशन, बिजली आपूर्ति, ग्रिड क्षमता और आसान भुगतान जैसी सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक चार्जिंग ढांचे का विस्तार इसी व्यापक ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।

प्रमुख शहरों के साथ हाईवे और दूसरे महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर चार्जिंग नेटवर्क के लिहाज से खास महत्व रखते हैं। इन स्थानों पर पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं विकसित होने से शहरों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों से यात्रा करना आसान हो सकता है।

ग्रीन मोबिलिटी को मिल रही नई दिशा

उत्तर प्रदेश का पब्लिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में देश में तीसरे स्थान पर पहुंचना और लाखों इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण राज्य में ग्रीन मोबिलिटी के बढ़ते दायरे को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में ईवी की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग नेटवर्क को भी उसी गति से विकसित करना चुनौती और अवसर दोनों होगा।

सरकार के सामने अब अगला लक्ष्य चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता, विश्वसनीयता और भौगोलिक पहुंच को और बेहतर बनाने का होगा। यदि वाहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार समान गति से जारी रहता है तो उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: APN Live