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Lockdown in India: भूख और बीमारी से बिहार में हुई मौत, प्रशासन ने नकारा

कोरोना वायरस से बचने के लिए बिहार सहित पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है. कल-कारख़ानों से लेकर छोटे-मोटे काम-धंधे तक सब बंद है. बड़ी संख्या में देश के दूसरे हिंस्सों में काम करने वाले प्रवासी मज़दूर राज्य में लौट रहे हैं.

राज्य में रह रहे गरीब तबके, ख़ासकर रोज़ कमाने और रोज़ खाने वाले तबके के साथ सबसे ज़्यादा दिक्कत आ रही है. बिहार के आरा ज़िले से एक बड़ी ख़बर आ रही है. आ रही ख़बर के मुताबिक़ आरा के जवाहर टोला मुसहर टोली में 26 मार्च को 11 वर्षीय राहुल मुसहर की मौत हो गई.

मृतक राहुल के माता-पिता.

राहुल बीमार था. उसे बुखार था. दस्त हो रही थी. राहुल के पिता दुर्गा मुसहर उसे लेकर 23 तारीख़ को आरा सदर अस्पताल गए थे. वहां इलाज तो हुआ लेकिन दवाई बाहर से लाने के लिए कहा गया. पैसा था नहीं तो दुर्गा अपने बेटे को लेकर घर वापिस आ गए.

मृतक राहुल के पिता दुर्गा मुसहर का कहना है, "पलदारी का काम करते थे. 21 तारीख़ से बैठा-बैठी है. पैसा है नहीं. एही(इसी) में लाईका(लड़का) बीमार. अस्पताल ले गए तो दवाई नहीं मिला. बाहर से खरीदने के लिए पैसा नहीं था. घर में खर्ची भी नहीं था. एक सांझ खाना और एक सांझ ऐसे ही चल रहा था.बिना दबाई और और भरपेट भोजन के हमारा लड़का मर गया."

परिवार का संकट ख़त्म नहीं हुआ है. वो अपने बेटे खो खोने से ज़्यादा आगे आने वाले दिनों के लिए परेशान हैं. दुर्गा मुसहर की पत्नी इस बात से चिंतित हैं कि अगर कुछ दिन और बैठना पड़ा. काम नहेने मिला और संगठनों की तरफ से मिला राशन ख़त्म हुआ तो क्या होगा?

एशियाविल ने मामले की आधिकारिक पुष्टि के लिए आरा के ज़िलाधिकारी रौशन कुशवाहा को फ़ोन किया, उनके कहने पर मैसेज किया लेकिन ख़बर लिखे जाने तक उनकी तरफ़ से कुछ नहीं कहा गया है. ख़बर लिकने के कुछ देर बार ज़िलाधकारी का एसएमएस आया जिसमें उन्होंने कहा कि लड़के की मौत भूख से नहीं हुई है. वो पिछले कई दिनों से बीमार था. एशियाविल हिंदी ने जब ज़िलाधिकारी से सही इलाज ना मिल पाने और दवाई बाहर से लेने के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब नहीं दिया.

वहीं राजनीतिक पार्टी सीपीआई(माले) मामले को जोरशोर से उठा रही है। पार्टी ने इस बारे में ट्विट्ट भी किया है.

वहीं आरा से सीपीआई (माले) की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके राजू यादव का कहना है कि राहुल बीमार था और उसकी बीमारी की एक बड़ी वजह थी कि परिवार के पास कुछ खाने के लिए नहीं था. उसके पिता जनता कर्फ़्यू (22 मार्च) वाले दिन से खाली बैठे हैं. इनलोगों के पास कोई बैंक बैलेंस नहीं रहता. रोज़ कमाते हैं. रोज़ खाते हैं. अस्पताल गए तो कहा गया कि दवाई बाहर से खरीद लीजिए. उनके पास पैसे नहीं थे सो बीमार को लेकर घर आ गए. इस मौत की वजह घूसख़ोरी, बिना सोचे-समझे पूरे देश में लॉकडाउन और भूख नहीं तो क्या है?

आपको बता दें कि कोरोना वायरस के आतंक को कम करने की वजह से किए गए लॉकडाउन ने देश की एक बड़ी आबादी के सामने खाने और ज़िंदा रहने का संकट पैदा कर दिया है.

Dailyhunt
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