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अच्छे न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 'कूलिंग-ऑफ अवधि' की जरूरत नहीं : विधि मंत्री मेघवाल

अच्छे न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 'कूलिंग-ऑफ अवधि' की जरूरत नहीं : विधि मंत्री मेघवाल

Awaz The Voice 4 months ago

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सरकारी पद स्वीकार करने से पहले अनिवार्य ''कूलिंग-ऑफ अवधि'' (सेवानिवृत्ति के बाद कुछ समय तक कोई भी सरकारी पद न संभालना) लागू करने के विचार को खारिज करते हुए कहा है कि ''विवेकशील और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ'' लोगों को काम जारी रखने से रोकने का कोई औचित्य नहीं है।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मेघवाल ने बृहस्पतिवार को 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि न्यायपालिका के भीतर ही इस मुद्दे पर ''दो तरह की सोच'' है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तुरंत नयी जिम्मेदारियां लेनी चाहिए या नहीं।

इस विषय पर पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा, ''कुछ लोगों का मानना है कि कूलिंग-ऑफ अवधि होनी चाहिए, कुछ का कहना कि नियुक्तियां जल्दबाजी में नहीं की जानी चाहिए, जबकि अन्य का मत है कि इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। हर व्यक्ति की अपनी अलग राय है।''

मंत्री ने न्यायाधिकरणों में खाली पदों की ओर इशारा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) जैसे निकायों में अनुभवी निर्णायकों की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ''हमारे पास न्यायाधिकरण हैं। एनसीएलटी और एनसीएलएटी हैं। अगर कोई सक्षम व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ और न्यायिक समझ वाला है, तो उसे जल्दी काम देने में क्या समस्या है?''

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्तियों को लेकर बहस जारी है और कानूनी समुदाय तथा विपक्ष के कुछ वर्ग न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संभावित हितों के टकराव को लेकर चिंता जता रहे हैं।

न्यायाधिकरणों के अलावा सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), लोकपाल, विधि आयोग, भारतीय प्रेस परिषद तथा समय-समय पर गठित उच्चस्तरीय समितियों और आयोगों में भी की जाती है।

मेघवाल ने कहा कि कूलिंग-ऑफ अवधि को लेकर बहस अक्सर इस धारणा पर आधारित होती है कि न्यायाधीशों को अनुकूल फैसलों के बदले सेवानिवृत्ति के बाद पद दिए जाते हैं, लेकिन ऐसी धारणाएं गलत हैं।

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