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भारत ने मुक्केबाजी में रचा स्वर्णिम इतिहास

भारत ने मुक्केबाजी में रचा स्वर्णिम इतिहास

Awaz The Voice 1 week ago
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नई दिल्ली।

राष्ट्रमंडल खेल 2026 (कॉमनवेल्थ गेम्स) में भारतीय मुक्केबाजों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ग्लासगो में आयोजित खेलों में भारत ने मुक्केबाजी में कुल 10 पदक, जिनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक शामिल हैं, जीतकर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराया। भारत की इस ऐतिहासिक सफलता में महिला मुक्केबाज साक्षी चौधरी की स्वर्णिम जीत सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद साक्षी चौधरी ने इस उपलब्धि को "सपने के सच होने जैसा" बताया। उन्होंने कहा कि पूरे देश से मिल रहा सम्मान और स्वागत उनके लिए बेहद भावुक क्षण है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय मुक्केबाजी दल के भव्य स्वागत के दौरान साक्षी ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।

महिलाओं के 51 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को 5-0 के एकतरफा फैसले से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पूरे मुकाबले में साक्षी ने शानदार तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। उन्होंने विरोधी मुक्केबाज के अधिकांश हमलों को सफलतापूर्वक रोका और सटीक जवाबी पंचों से निर्णायकों को प्रभावित किया। अंतिम राउंड तक उन्होंने अपना दबदबा बनाए रखा और सर्वसम्मत निर्णय से मुकाबला जीत लिया।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पहली बार किसी एक संस्करण में भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि अब तक किसी भी देश ने कॉमनवेल्थ गेम्स के एक संस्करण में मुक्केबाजी में इससे अधिक स्वर्ण पदक नहीं जीते हैं।

भारत के लिए विश्व चैंपियन जैसमीन लम्बोरिया, प्रीति पवार (54 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीते। वहीं लवलीना बोरगोहेन, जादुमणि सिंह और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदक अभियान को और मजबूत बनाया।

साक्षी चौधरी ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय पूरी भारतीय टीम, कोचिंग स्टाफ और खेल प्रबंधन को दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे भारतीय मुक्केबाजी दल की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा, "हमने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। 10 पदकों में से 7 स्वर्ण जीतना अपने आप में इतिहास है। अब हमारा पूरा ध्यान अगले बड़े लक्ष्य, एशियाई खेलों की तैयारी पर रहेगा।"

साक्षी के लिए यह वर्ष लगातार उपलब्धियों से भरा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह बनाने के लिए उन्होंने अपना भार वर्ग बदला और राष्ट्रीय चयन ट्रायल में दो बार की विश्व चैंपियन निखत ज़रीन को हराकर सबको चौंका दिया। इसके बाद उन्होंने विश्व मुक्केबाजी कप में अमेरिका की योसेलिन पेरेज़ को हराकर स्वर्ण पदक जीता और चेक गणराज्य में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स उस्ती नाद लाबेम प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इससे पहले वह विश्व जूनियर चैंपियन और दो बार विश्व युवा चैंपियन भी रह चुकी हैं।

भारतीय मुक्केबाजी टीम के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के मुक्केबाज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। ग्लासगो में मिली यह ऐतिहासिक सफलता भारतीय खेल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बन गई है और अब देश को उम्मीद है कि यही जोश और आत्मविश्वास एशियाई खेलों तथा ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी देखने को मिलेगा।


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