नई दिल्ली
HDFC लाइफ के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर समीर योगिश्वर ने कहा कि अगले दशक में इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए दुनिया भर में घूमने-फिरने वाले भारतीयों को पोर्टेबल और बॉर्डरलेस सुरक्षा देना एक मुख्य विषय बनने वाला है, क्योंकि ऐसे ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है जो ऐसा कवरेज चाहते हैं जो अलग-अलग जगहों पर उनके साथ चल सके।
योगिश्वर ने कहा, "आखिरकार, हम दुनिया भर में घूमने-फिरने वाले भारतीयों की बढ़ती संख्या देख रहे हैं, जिन्हें पोर्टेबल, बॉर्डरलेस सुरक्षा की ज़रूरत है जो अलग-अलग जगहों पर उनके साथ चल सके। मेरा पक्का मानना है कि इस मोबिलिटी के लिए तैयारी करना अगले दशक का एक अहम विषय होगा।" उन्होंने कहा कि ग्राहकों की बदलती ज़रूरतों ने लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स को ज़्यादा ज़रूरत-आधारित और कस्टमाइज़ेबल बना दिया है, हालांकि ग्राहकों का व्यवहार कई कारकों से प्रभावित होता रहता है।
उन्होंने कहा, "ग्राहकों की बदलती ज़रूरतों के साथ, लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स ज़्यादा ज़रूरत-आधारित हो गए हैं और उन्हें किसी की ज़रूरतों के हिसाब से कस्टमाइज़ किया जा सकता है। ग्राहकों का व्यवहार कई कारकों से प्रभावित हो सकता है, लेकिन साथ ही यह भी याद रखना ज़रूरी है कि एक ही चीज़ सबके लिए सही नहीं होती।" योगिश्वर ने कहा कि COVID-19 महामारी ने ग्राहकों के बीच टर्म इंश्योरेंस के फायदों और ज़रूरत के बारे में जागरूकता बढ़ाई है। उन्होंने कहा, "COVID के दौरान हमने देखा कि ग्राहक टर्म प्लान के फायदों और ज़रूरत के बारे में ज़्यादा जागरूक हुए। GST छूट के साथ, टर्म प्लान ने एक बार फिर ज़्यादा लोकप्रियता हासिल की है क्योंकि इनकी कीमत अब ज़्यादा लोगों की पहुँच में है।"
उन्होंने कहा कि ग्राहक सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के ज़रिए वेल्थ क्रिएशन और लक्ष्य-आधारित बचत पर भी ध्यान दे रहे हैं। योगिश्वर ने कहा, "सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के ज़रिए वेल्थ क्रिएशन/लक्ष्य-आधारित बचत पर भी ध्यान दिया जा रहा है।" गारंटीड सेविंग्स प्रोडक्ट्स पर उन्होंने कहा कि ऐसे लंबे समय के इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि पॉलिसीहोल्डर्स अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करते समय बाहरी उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हों। उन्होंने कहा, "गारंटीड सेविंग्स प्लान जैसे लंबे समय के इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि पॉलिसीहोल्डर्स बाहरी उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रभावित न हों। ये प्रोडक्ट्स आपको गारंटी देते हैं कि आपका लंबे समय का लक्ष्य हर हाल में पूरा होगा।"
योगिश्वर ने कहा कि ग्लोबल अनिश्चितता ग्राहकों के लिए गारंटीड, लंबे समय वाले प्रोडक्ट्स की अहमियत बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे दुनिया ज़्यादा अस्थिर और अनिश्चित होती जा रही है, गारंटीड, लंबे समय वाले प्रोडक्ट्स को सिर्फ़ सेविंग्स के साधन के तौर पर नहीं, बल्कि ग्लोबल अनिश्चितता के खिलाफ़ पर्सनल सुरक्षा के तौर पर देखा जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे पारंपरिक रूप से सोना रहा है।" भारत में इंश्योरेंस प्रोटेक्शन गैप (बीमा सुरक्षा के अंतर) पर योगेश्वर ने कहा कि बीमा पैठ (insurance penetration) लगभग 3.7% है, जबकि ग्लोबल औसत लगभग 7% है। उन्होंने कहा कि पहले लाइफ इंश्योरेंस मुख्य रूप से टैक्स बचाने के तरीके के तौर पर खरीदा जाता था, जबकि परिवारों के लिए फाइनेंशियल सुरक्षा कवच के तौर पर इसकी भूमिका को ठीक से नहीं समझा गया।
उन्होंने कहा कि प्रोटेक्शन गैप को कम करने के लिए जागरूकता, पहुंच और किफायती होना ज़रूरी होगा। योगेश्वर ने कहा, "आगे देखते हुए, मुझे लगता है कि प्रोटेक्शन गैप किसी एक बड़े कदम से नहीं, बल्कि बीमा के 'इनविज़िबल' (अदृश्य) होने से कम होगा - यानी सैलरी क्रेडिट, होम लोन या UPI ट्रांज़ैक्शन जैसे रोज़मर्रा के फाइनेंशियल कामों में बीमा का आसानी से शामिल हो जाना।" उन्होंने कहा कि बीमा सुगम और बीमा वाहक जैसी पहल, और बीमा कंपनियों के इनोवेशन से बीमा कवरेज बढ़ाने के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सकता है। योगेश्वर की बातें बताती हैं कि बीमा कंपनियों को उन ग्राहकों तक पहुंचने के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है जिनकी फाइनेंशियल और पर्सनल स्थितियां अलग-अलग जगहों से जुड़ी होती हैं, और प्रोटेक्शन सॉल्यूशन डिज़ाइन करते समय पोर्टेबिलिटी एक अहम बात बन जाती है।

