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जबरन उर्वरक टैगिंग पर आईएमएमए की चिंता

जबरन उर्वरक टैगिंग पर आईएमएमए की चिंता

Awaz The Voice 2 weeks ago

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

जैव-उत्तेजक (बायोस्टिमुलेंट), जल-घुलनशील उर्वरक तथा सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट) जैसे विशेष उर्वरकों को सब्सिडी वाले यूरिया और डीएपी के साथ जबरन बेचना (टैगिंग) अवैध है जिससे किसानों के साथ-साथ लगभग एक अरब डॉलर के विशेष उर्वरक उद्योग को भी नुकसान हो रहा है।

इंडियन माइक्रो फर्टिलाइजर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएमएमए) ने यह बात कही।

इंडियन माइक्रो फर्टिलाइजर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएमएमए) के अध्यक्ष राहुल मीरचंदानी ने कहा कि डीलर बिक्री के समय बिना सब्सिडी वाले विशेष उत्पादों को सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ जबरन जोड़कर बेच रहे हैं, जिससे किसानों के पास ऐसे उत्पाद खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, जिनकी उन्हें आवश्यकता भी नहीं होती।

उन्होंने दो जुलाई से चार जुलाई तक आयोजित 'विशेष फर्टिलाइजर समिट एंड बी2बी एक्सपो 2026 (एसओएमएस 2026)' में कहा, ''यह प्रथा वर्षों की किसान जागरूकता और मांग सृजन के माध्यम से स्थापित वैध ब्रांडों की साख को नुकसान पहुंचा रही है।''

एसोसिएशन ने कहा कि यह प्रथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार एवं प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत प्रतिबंधित 'टाई-इन अरेंजमेंट' की श्रेणी में आती है। साथ ही, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश (एफसीओ) की धारा 31 के तहत दंडनीय भी है, जिसके अंतर्गत अवैध वस्तुओं का भंडारण करने पर डीलर का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।

आईएमएमए ने अगस्त 2025 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा सुनाए गए उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें 'टैगिंग' को खुदरा स्तर की अनियमितता एवं बाजार में प्रभुत्व के प्रथमदृष्टया दुरुपयोग के रूप में माना गया था।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि संसद की स्थायी समिति ने भी टिप्पणी की थी कि लाभार्थियों को सब्सिडी वाले यूरिया के साथ कोई अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

आईएमएमए के अनुसार, कई राज्यों ने 'टैगिंग' के खिलाफ कार्रवाई की है। उसने कहा कि जबरन 'टैगिंग' को समाप्त करना ''राष्ट्रीय आवश्यकता'' है और इससे किसानों, डीलर और विशेष उर्वरक क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की रक्षा होगी।

एसोसिएशन ने कहा कि वह इस मुद्दे को सितंबर में दिल्ली में होने वाले सरकारी नीति संवाद और फरवरी में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय फसल पोषण शिखर सम्मेलन में भी उठाएगा।

चार दशक पूरे कर रहे आईएमएमए ने कहा कि उसने पहली बार विशेष उर्वरक क्षेत्र के आकार का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र अध्ययन कराया है।

अध्ययन के अनुसार, जल-घुलनशील उर्वरक, जैव-उत्तेजक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संयुक्त बाजार 91.8 करोड़ डॉलर (करीब 8,200 करोड़ रुपये) का है।

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