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मुस्लिम महिलाओं का खतना कैसे होता है ?

मुस्लिम महिलाओं के बारे में अक्सर अनेकों प्रचलित प्रथाओं आदि के बारे में बातें सामने आती रहती हैं. हाल ही जारी एक स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार दाऊदी बोहरा समुदाय की लगभग तीन चौथाई महिलाओं को खतने जैसी क्रूर और वीभत्स धार्मिक परंपरा से गुजरना पड़ता है.

मुस्लिम महिलाओँ में प्रताड़ना की निर्मम और भयावह सच्चाई बयां करती खतना प्रथा से जुड़ी कुछ भयावह बातें जानिये

दुनिया के कई देशों में प्रचलित .

मुस्लिम समुदाय में पुरुषों के खतना प्रथा के बारे में तो सभी को पता ही होगा. दुनिया के कई देशों में पुरुषों के साथ महिलाओं के भी खतना की इस भयावह प्रक्रिया से होकर गुजरना होता है.

दाऊदी बोहरा समुदाय

महिलाओं में खतना प्रथा का चलन दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में सबसे अधिक देखा जाता है. दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय, शिया मुसलमानों माने जाते हैं. यह समुदाय मुस्लिम महिलाओँ के खतना को एक धार्मिक परंपरा मानता है. दुनिया में इनकी संख्या लगभग 25 लाख से कुछ अधिक है.

भारत में दोऊदी बोहरा समुदाय

भारत में दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के लोग गुदरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में रहती हैं. दाऊदी बोहरा समुदाय के लोग भारत में सबसे अधिक शिक्षित समुदायों में से एक माने जाते हैं.

पीड़ा औऱ समस्या

बीबीसी के बात करते हुए एक महिला ने बताया कि जब मैं बेहद छोटी थी तब मेरा खतना किया गया. उस समय यह एक सुई चुभोने के दर्द जैसा था लेकिन इसका असली दर्द बाद में समझ आय़ा जब मुझे पेशाब करते समय बेपनाह दर्द होता था. ऐसी तकलीफ खई हफ्तों तक हुई थी.

महिलाओं के खतना किये जाने की इस प्रक्रिया को खफ्द या फीमेल जेनाइटल म्यूटिलेशन भी कहा जाता है.

मानवाधिकारों का उल्लंघन

संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार "एफ़जीएम की प्रक्रिया में लड़की के जननांग के बाहरी हिस्से को काट दिया जाता है या इसकी बाहरी त्वचा निकाल दी जाती है."

इस भयावह प्रकिया को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकारों का उल्लंघन मानता है. साल 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसे दुनिया से खत्म करने के लिए एक संकल्प लिया गया.

अंतर्राष्ट्रीय दिवस

महिलाओं के साथ होने वाली इस निर्मम और भयावह खतना नामक प्रक्रिया के खिलाफ जागरुकता बढ़ाने का फैसला भी लिया गया. इस प्रक्रिया को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 6 फरवरी को मनाने के लिए घोषणा की,

प्रक्रिया और रिवाज

बोहरा समुदाय में लड़कियों की बेहद छोटी उम्र जैसे 6 से 8 साल के बीत में ही खतना करा दिया जाता है. इसके अंतर्गत क्लिटरिस के बाहरी हिस्से में कट लगाना या बाहरी हिस्से की त्वचा को निकाल दिया जाना शामिल होता है.

खतना के बाद हल्दी, गर्म पानी और छोटे-मोटे मरहम लगाकर लड़कियों के दर्द को कम करने का प्रयास किया जाता है.

अनेकों तर्क

बीबीसी से बात करते हुए बोहरा मुस्लिम समुदाय से संबंधित एक महिला के अनुसार क्लिटरिस को बोहरा समाज में हराम की बोटी कहा जाता है. बोहरा समुदाय में यह भी माना जाता है कि इसकी मौजूदगी से लड़की की यौन इच्छा बढ़ती है और इसे रोकना चाहिये.

ऐसा माना जाता है कि क्लिटरिस हटा देने से लड़की की यौन इच्छा कम हो जाती है और वो शादी से पहले यौन संबंध नहीं बनाएगी.

कई देशों में बैन

महिलाओं के खतने से संबंधित इस निर्मम प्रक्रिया को दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, यूके, अमेरिका, स्वीडन,डेनमार्क और स्पेन आदि में बैन कर दिया करके इसे अपराध घोषित किया जा चुका है.

भारत में बैन करने की मांग

भारत में सहियो और जैसी गैर सरकारी संस्थाएं जो महिलाओं के लिए काम करती हैं इस प्रक्रिया को बैन करने की मांग लगातार कर रही हैं.

भारत में आंकड़ा नहीं

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार हाल में ही एफजीएम पर रोक लगाने की लेकर दायर की गई एक याचिका के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय से जवाब मांगा था.

मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया था कि सरकार के पास इससे संबंधित कोई भी आपराधिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

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