American Revolution History: लगभग 250 साल पहले, 4 जुलाई 1776 को अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा हुई थी. यह घटना विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य से 13 उपनिवेशों को आजादी दिलाई और संयुक्त राज्य अमेरिका की नींव रखी.
इस संघर्ष की कहानी वीरता, बलिदान और नेतृत्व की है, जिसमें जॉर्ज वॉशिंगटन का नाम सबसे प्रमुख है.
ब्रिटिश उपनिवेशों में असंतोष
18वीं शताब्दी में ब्रिटेन के 13 उपनिवेश (जो आज अमेरिका के पूर्वी हिस्से हैं) ब्रिटिश मुकुट के अधीन थे. ब्रिटेन ने इन उपनिवेशों पर भारी कर लगाए, जैसे स्टांप एक्ट और टाउनशेंड एक्ट्स. उपनिवेशवासियों का मानना था कि बिना प्रतिनिधित्व के कर लगाना अन्याय है ('No taxation without representation').
1770 के दशक में तनाव बढ़ा. 1773 का बोस्टन टी पार्टी (Boston Tea Party) एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसमें उपनिवेशवासियों ने ब्रिटिश चाय के जहाज पर हमला कर चाय समुद्र में फेंक दी. ब्रिटेन ने सख्ती से जवाब दिया, जिससे युद्ध की आग भड़क उठी.
स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत (1775)
अप्रैल 1775 में लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड की लड़ाइयां (Battles of Lexington and Concord) हुईं, जो अमेरिकी क्रांति की शुरुआत मानी जाती हैं. उपनिवेशवासियों ने ब्रिटिश सैनिकों का मुकाबला किया.
मई 1775 में दूसरा कॉन्टिनेंटल कांग्रेस फिलाडेल्फिया में हुआ. 15 जून 1775 को जॉर्ज वॉशिंगटन को कॉन्टिनेंटल आर्मी का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया. वॉशिंगटन, वर्जीनिया के एक धनी किसान और फ्रेंच-इंडियन वॉर के अनुभवी सैनिक थे. उन्होंने एक अनुशासित सेना बनाने का बीड़ा उठाया, हालांकि संसाधन बेहद कम थे.
स्वतंत्रता की घोषणा (4 जुलाई 1776)
1776 में थॉमस जेफरसन, जॉन एडम्स, बेंजामिन फ्रैंकलिन आदि की समिति ने स्वतंत्रता की घोषणा तैयार की. 2 जुलाई को कांग्रेस ने स्वतंत्रता का प्रस्ताव पास किया और 4 जुलाई को पूर्ण घोषणा-पत्र को मंजूरी दी. इसमें ब्रिटिश राजा जॉर्ज III पर आरोप लगाए गए और कहा गया कि सभी मनुष्य समान हैं और उन्हें जीवन, स्वतंत्रता और खुशी का अधिकार है.
यह घोषणा सिर्फ कागजी नहीं थी; इसके पीछे लंबा युद्ध था.
जॉर्ज वॉशिंगटन का नेतृत्व
वॉशिंगटन ने युद्ध के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया. सेना में कमी, संसाधनों की कमी, सैनिकों का मनोबल गिरना और ब्रिटिश सेना की ताकत. फिर भी उन्होंने:
- 1776 में ट्रेंटन और प्रिंसटन की आश्चर्यजनक जीत हासिल की.
- फ्रांस से मदद ली (फ्रांस ब्रिटेन का दुश्मन था).
- 1781 में यॉर्कटाउन की निर्णायक लड़ाई में ब्रिटिश जनरल कॉर्नवॉलिस को हरा दिया. फ्रांसीसी सेना की मदद से यह जीत हुई, जिसने युद्ध को समाप्त कर दिया.
1783 में पेरिस की संधि से ब्रिटेन ने अमेरिका की स्वतंत्रता स्वीकार कर ली. वॉशिंगटन ने अपनी सेना का कमान छोड़ दिया और माउंट वर्नोन लौट गए. उन्होंने सत्ता का लालच नहीं किया, जो उनके चरित्र को दर्शाता है.
संविधान और राष्ट्रपति पद
स्वतंत्रता के बाद 13 राज्य एक संघ बनाना चाहते थे. 1787 में संवैधानिक सम्मेलन हुआ, जिसमें वॉशिंगटन को अध्यक्ष चुना गया. नया संविधान बनाया गया, जो आज भी अमेरिका का आधार है. 1789 में पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ. जॉर्ज वॉशिंगटन को इलेक्टोरल कॉलेज से सर्वसम्मति से चुना गया. 30 अप्रैल 1789 को न्यूयॉर्क के फेडरल हॉल में उन्होंने शपथ ली. उन्होंने दो बार (1789-1797) राष्ट्रपति पद संभाला और दो-कार्यकाल की परंपरा स्थापित की. उन्होंने मजबूत राष्ट्रीय सरकार बनाई, विदेश नीति में तटस्थता अपनाई और देश को एकजुट रखा.
जॉर्ज वॉशिंगटन को 'अमेरिका के पिता' कहा जाता है. उन्होंने युद्ध में जीत दिलाई, संविधान बनवाया और लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी. उनकी ईमानदारी और त्याग की मिसाल आज भी प्रेरणा देती है.
-भारत एक्सप्रेस

