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भारत का अनोखा चर्च: 6 महिने जमीन पर रहता तो 6 महिने पानी में डूब जाती है ये 160 साल पुरानी इमारत

भारत का अनोखा चर्च: 6 महिने जमीन पर रहता तो 6 महिने पानी में डूब जाती है ये 160 साल पुरानी इमारत

Shettihalli Rosary Church: हमारे देश में घूमने-फिरने और इतिहास को समेटे कई ऐसी जगहें हैं, जिन्हें देखकर इंसान दांतों तले उंगली दबा लेता है. ऐसा ही एक अजूबा कर्नाटक की खूबसूरत वादियों में मौजूद है, जिसे लोग 'तैरने वाला चर्च' या 'फ्लोटिंग चर्च' कहते हैं.

हम बात कर रहे हैं करीब 160 साल पुराने शेट्टीहल्ली रोजरी चर्च (Shettihalli Rosary Church) की. इस चर्च की सबसे अनोखी बात ये है कि ये साल के 6 महीने गहरे पानी में डूबा रहता है और बाकी के 6 महीने इसके आसपास की जमीन पूरी तरह सूख जाती है. प्रकृति और इतिहास का ये अनोखा खेल हर साल पर्यटकों को हैरान कर देता है.

इस चर्च का इतिहास बेहद दिलचस्प है. इसका निर्माण 1860 के दशक में भारत आए फ्रांसीसी मिशनरियों ने करवाया था. उस दौर में ये चर्च ब्रिटिश अधिकारियों, बड़े-बड़े बागान मालिकों और स्थानीय ईसाई समुदाय की प्रार्थनाओं का मुख्य केंद्र हुआ करता था. फ्रेंच गोथिक वास्तुकला (Architecture) से बने इस चर्च की ऊंची-ऊंची दीवारें, मेहराबें और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी इसकी भव्यता की गवाही देती थी. यह चर्च हेमावती नदी के किनारे बड़ी शान से खड़ा था.

आजादी के बाद, 1960 के दशक में इस पूरे इलाके का नक्शा बदल गया. सरकार ने कृषि और पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए यहां हेमावती बांध (Hemavati Dam) बनाने का फैसला किया. बांध बनने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और आसपास के गांवों को खाली कराना पड़ा. लोग तो दूसरी जगह जाकर बस गए, लेकिन ये चर्च वहीं अकेला रह गया. पानी के लगातार थपेड़ों से इसकी छत गिर गई और दीवारें ढह गईं, लेकिन इसके मजबूत खंभे आज भी सीना ताने खड़े हैं.

मानसून के आते ही जब जलाशय पानी से लबालब भर जाता है, तब ये चर्च आधा पानी में समा जाता है. दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो कोई पुरानी ऐतिहासिक इमारत पानी के ऊपर तैर रही हो. वहीं, सर्दियों और गर्मियों के मौसम में जब पानी का स्तर कम होता है, तो पानी पूरी तरह हट जाता है और लोग पैदल चलकर इस चर्च के अंदर तक जा सकते हैं.

सुनसान माहौल और पानी के बीच खड़े इस खंडहर को देखकर सोशल मीडिया पर कई भूतिया कहानियां भी उड़ती हैं, हालांकि यहां किसी भी तरह के पैरानॉर्मल एक्टिविटी का कोई सबूत नहीं है. आज यह जगह देश भर के ट्रैवलर्स, फोटोग्राफर्स और नेचर लवर्स के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन चुकी है.

-भारत एक्सप्रेस

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