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भारत की इस नदी में रहते हैं घड़ियाल: हर साल पैदा हो रहे 30 हजार से ज्यादा बच्‍चे, ये मगरमच्छों जितने खूंखार नहीं होते

भारत की इस नदी में रहते हैं घड़ियाल: हर साल पैदा हो रहे 30 हजार से ज्यादा बच्‍चे, ये मगरमच्छों जितने खूंखार नहीं होते

WILDLIFE NEWS: मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (National Chambal Sanctuary) से इन दिनों विहंगम नजारे देखने को मिल रहे हैं. चंबल नदी के साफ और प्रदूषण मुक्त पानी में घड़ियालों के नन्हे बच्चे सामूहिक रूप से जलक्रीड़ा करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

नदी की नीली लहरों पर सैकड़ों की तादाद में छोटे-छोटे घड़ियाल सतह पर तैरते हुए मस्ती कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, चंबल नदी का रेतीला किनारा और इसका शुद्ध वातावरण घड़ियालों के प्रजनन के लिए पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है.

मई-जून में अंडों से बाहर आते हैं नन्हे जीव

जलीय जीव विशेषज्ञ ज्योति डंडौतिया (नेशनल चंबल सेंचुरी) के मुताबिक, चंबल नदी के किनारे हर साल अनुमानित रूप से 30 हजार से ज्यादा नन्हे घड़ियाल जन्म लेते हैं. मादा घड़ियाल मार्च और अप्रैल के महीने में नदी के रेतीले किनारों पर गहरे घोंसले खोदकर अंडे देती हैं. इसके बाद मई के आखिरी सप्ताह से लेकर जून के शुरुआती दिनों में इन अंडों से नन्हे बच्चे बाहर निकल आते हैं. हाल ही में हुई बारिश के बाद पानी का तापमान सामान्य होने से ये बच्चे पानी की सतह पर झुंड बनाकर तैर रहे हैं. हालांकि, कुदरत का नियम यहां बेहद कड़ा है. जुलाई में नदी में बाढ़ आने के कारण कई छोटे बच्चे बह जाते हैं, जिससे इनमें से केवल 3 फीसदी बच्चे ही सुरक्षित बच पाते हैं.

भारत में कहां-कहां पाए जाते हैं घड़ियाल?

भारत में घड़ियालों का सबसे बड़ा निवास चंबल नदी (मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा) है. इसके अलावा ये उत्तर भारत की गिरवा नदी (कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य, यूपी), राप्ती नदी, नारायणी नदी और रामगंगा नदी (जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास) में पाए जाते हैं. ओड़िशा की महानदी में भी इन्हें कन्सर्वेशन प्रोग्राम के तहत संरक्षित किया गया है. ये केवल साफ और बहते हुए मीठे पानी की नदियों में रहना पसंद करते हैं, तालाबों या गंदे पानी में ये सर्वाइव नहीं कर पाते.

अंबानी के 'वंतारा' सेंटर में खास सुविधाएं

रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनंत अंबानी द्वारा गुजरात के जामनगर में बनाए गए दुनिया के सबसे बड़े रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर 'वंतारा' (Vantara - Wildlife Centre) में घड़ियालों के लिए भी एक विशेष और अत्याधुनिक जलीय इकोसिस्टम तैयार किया गया है. इस सेंटर में देश के अलग-अलग हिस्सों से रेस्क्यू किए गए बीमार या घायल घड़ियालों और मगरमच्छों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा और प्राकृतिक आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि उनकी लुप्तप्राय प्रजाति को बचाया जा सके.

घड़ियाल का जीवनकाल और खान-पान

एक स्वस्थ घड़ियाल का औसत जीवनकाल लगभग 40 से 50 वर्ष तक होता है. अपने विशेष पतले मुंह की बनावट के कारण इनका मुख्य भोजन केवल मछलियां होती हैं. ये पानी में तेजी से तैरती मछलियों को अपने नुकीले दांतों से झपट्टा मारकर पकड़ते हैं. इसके अलावा छोटे घड़ियाल पानी के कीड़े-मकोड़े और मेंढक भी खाते हैं.

मगरमच्छ और घड़ियाल में कितना अंतर?

अक्सर लोग घड़ियाल (Gharial) और मगरमच्छ (Crocodile) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर होता है.

बनावट का अंतर: घड़ियाल का मुंह (स्नाउट) बेहद लंबा और पतला होता है, जिसके आगे एक घड़े जैसा उभार होता है (इसी वजह से इन्हें घड़ियाल कहा जाता है). वहीं, मगरमच्छ का मुंह चौड़ा, भारी और 'U' या 'V' आकार का होता है.

क्या घड़ियाल कमजोर होते हैं?

शारीरिक ताकत के मामले में घड़ियाल, मगरमच्छ से कमजोर होते हैं. मगरमच्छ के जबड़े में भारी दबाव और ताकत होती है, जिससे वे बड़े से बड़े शिकार की हड्डियां तोड़ सकते हैं. इसके विपरीत, घड़ियाल के पतले जबड़े केवल मछली पकड़ने के अनुकूल होते हैं, भारी शिकार के लिए नहीं.

इंसानों के लिए कौन ज्यादा खूंखार?

मगरमच्छ इंसानों के लिए घड़ियालों से कहीं ज्यादा खूंखार और घातक होते हैं. मगरमच्छ इतने आक्रामक होते हैं कि वे इंसानों पर सीधा हमला कर उन्हें पूरा निगल सकते हैं. इसके उलट, घड़ियाल बेहद शर्मीले स्वभाव के होते हैं. अपने पतले मुंह के कारण वे इंसानों को चबा या निगल नहीं सकते, इसलिए वे इंसानों पर हमला नहीं करते.

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