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ग्लासगो में लहराया तिरंगा! अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास, जीते 2 गोल्ड; पीएम मोदी ने यूं जताई खुशी

ग्लासगो में लहराया तिरंगा! अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास, जीते 2 गोल्ड; पीएम मोदी ने यूं जताई खुशी

CWG 2026 Judo Gold Medal: ब्रिटेन के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG 2026) से भारत के लिए एक साथ दो गौरवान्वित करने वाली खबरें आई हैं. भारतीय जूडो दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया है.

महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में अस्मिता डे ने पहला गोल्ड जीता, जिसके कुछ ही समय बाद पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने भी देश की झोली में दूसरा स्वर्णिम पदक डाल दिया.

इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दोनों एथलीटों की जमकर तारीफ की. पीएम मोदी ने अस्मिता डे को बधाई देते हुए लिखा कि उनके उत्कृष्ट रणनीतिक कौशल, समर्पण और धैर्य ने इतिहास रचा है. वहीं हर्ष सिंह की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी तकनीक, जबरदस्त आक्रामकता और रक्षात्मक अनुशासन पर हर भारतीय को गर्व है.

अस्मिता डे ने जूडो में जिताया कॉमनवेल्थ इतिहास का पहला सोना

शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे का मुकाबला कनाडा की हेइडी क्वैच से हुआ. बेहद रोमांचक और कड़े मुकाबले में अस्मिता ने अपनी बेहतरीन रणनीति और रक्षात्मक संयम का परिचय देते हुए क्वैच को 2-1 से मात दी.

कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो खेल में भारत का यह पहला स्वर्ण पदक है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'अस्मिता की यह सफलता उनकी प्रतिबद्धता और ध्यान केंद्रित प्रशिक्षण का नतीजा है. मुझे यकीन है कि वह आगे भी देश का नाम रोशन करती रहेंगी.'

हर्ष सिंह का शानदार दांव, ऑस्ट्रेलिया के कैट्ज को चटाई धूल

अस्मिता के स्वर्णिम प्रदर्शन के तुरंत बाद पुरुषों के 60 किग्रा जूडो फाइनल में हर्ष सिंह ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. फाइनल में उनका सामना ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष खिलाड़ी जोशुआ कैट्ज से था.

शुरुआती टक्कर के बाद मुकाबले में जब महज 41 सेकेंड का समय बचा था, तब हर्ष ने एक शानदार 'वाजा-अरी' (जूडो में दूसरी सबसे ज्यादा अंक दिलाने वाली तकनीक) का इस्तेमाल कर बढ़त बना ली. इसके बाद चार मिनट के बाकी समय में उन्होंने मजबूती से बचाव करते हुए भारत को जूडो में दूसरा गोल्ड मेडल दिला दिया.

यामिनी मौर्या से अब तीसरे गोल्ड की उम्मीद

अस्मिता और हर्ष की इस ऐतिहासिक सफलता ने वैश्विक स्तर पर भारतीय जूडो के बढ़ते दबदबे को साबित कर दिया है. भारत का स्वर्णिम सफर यहीं थमने वाला नहीं है, क्योंकि यामिनी मौर्या ने भी महिलाओं के 57 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में जगह बना ली है. सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका की डोने ब्रेयटेनबैक को 'इप्पोन' से हराने के बाद अब फाइनल में उनका मुकाबला इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक से होगा.

-भारत एक्सप्रेस

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