Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
क्रिकेट के लिए छोड़ दिया 10वीं का बोर्ड एग्जाम; जानिए कितने पढ़ें-लिखे है टीम इंडिया के 'वंडर किड' वैभव सूर्यवंशी

क्रिकेट के लिए छोड़ दिया 10वीं का बोर्ड एग्जाम; जानिए कितने पढ़ें-लिखे है टीम इंडिया के 'वंडर किड' वैभव सूर्यवंशी

Vaibhav Sooryavanshi Education: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने शनिवार को इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में जैसे ही टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया, चारों तरफ बस उन्हीं की चर्चा होने लगी.

मैदान पर चौके-छक्के बरसाने वाले वैभव इस समय सिर्फ अपने खेल की वजह से ही नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई और इम्तिहान को लेकर भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. लेकिन देश का यह नया स्टार कितना पढ़ा-लिखा है? आइए जानते है.

IPL के लिए छोड़ी 10वीं की बोर्ड परीक्षा

वैभव सूर्यवंशी इस साल 10वीं क्लास के छात्र थे. जब फरवरी में CBSE की 10वीं बोर्ड परीक्षाएं शुरू हुईं, तो सोशल मीडिया पर उनके एग्जाम देने को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ी थीं. लेकिन असल में वैभव अपने परीक्षा केंद्र पहुंचे ही नहीं थे. IPL 2026 में खेलने और अपने खेल पर पूरा फोकस रखने के लिए उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं से दूरी बना ली थी.

वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी ने खुद इस बात की पुष्टि की थी कि उनके बेटे ने इस साल परीक्षा नहीं दी है क्योंकि उसका पूरा ध्यान क्रिकेट पर था. ताजपुर के मॉडेस्टी स्कूल के डायरेक्टर ने भी बताया था कि वैभव का एडमिट कार्ड तक आ गया था और पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल में उनका सेंटर पड़ा था, लेकिन उन्होंने पढ़ाई से पहले क्रिकेट को चुना. परिवार का कहना है कि वैभव अब अगले साल अपनी बोर्ड परीक्षा देंगे.

दो हिस्सों में बटा क्रिकेट जगत

वैभव के इतनी छोटी उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू करने को लेकर क्रिकेट जगत भी दो हिस्सों में बंटा नजर आया. जहां कई भारतीय दिग्गज उन्हें तुरंत मौका देने के पक्ष में थे, वहीं साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज डेरिल कलिनन ने इसके खिलाफ राय दी थी.

कलिनन ने कहा था कि वैभव की प्रतिभा लाजवाब है, लेकिन 15 साल की उम्र में उन पर इंटरनेशनल क्रिकेट का भारी दबाव डालना ठीक नहीं है. कलिनन का मानना था कि वैभव को अभी घर पर रहकर परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए थी, दोस्तों के साथ गली क्रिकेट खेलना चाहिए था और एक सामान्य बचपन जीना चाहिए था ताकि उनके खेल के साथ-साथ व्यक्तित्व का भी विकास हो सके. हालांकि, वैभव ने दबाव को पीछे छोड़ मैदान पर अपनी काबिलियत साबित करने का फैसला किया.

-भारत एक्सप्रेस

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Bharat Express Hindi