Mumbai Metro Opening: मुंबई अब मेट्रो कनेक्टिविटी के मामले में देश में दूसरे स्थान पर आ गई है और जल्द ही दिल्ली को पीछे छोड़कर पहले नंबर पर काबिज होने वाली है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अनुसार, शहर में 100 किलोमीटर से ज्यादा का मेट्रो नेटवर्क बनकर तैयार हो चुका है.
इसी कड़ी में मेट्रो लाइन-9 (दहिसर पूर्व से मीरा-भायंदर) का फेज-1 जनता की सेवा के लिए शुरू किया जा रहा है, जो मुंबई और उपनगरों के बीच की दूरी को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा.
मेट्रो लाइन-9 की कुल लंबाई 10.5 किलोमीटर है, जो पूरी तरह एलिवेटेड है और इसमें कुल 8 स्टेशन बनाए गए हैं. वर्तमान में इसका फेज-1 शुरू हो रहा है, जो दहिसर पूर्व से काशीगांव तक 4.7 किलोमीटर लंबा है. इस शुरुआती चरण में चार प्रमुख स्टेशन—दहिसर (पूर्व), पांडुरंगवाड़ी, मिरागांव और काशीगांव शामिल हैं. यह विस्तार मीरा-भायंदर क्षेत्र के निवासियों के लिए सीधे मुंबई के मुख्य मेट्रो नेटवर्क से जुड़ने का रास्ता साफ करता है.
इस नई लाइन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'रेड लाइन' कनेक्टिविटी है. यह लाइन-7 (दहिसर पूर्व-अंधेरी पूर्व) और लाइन-7A के जरिए सीधे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़ती है. दहिसर पूर्व पर मौजूद इंटरचेंज जंक्शन इसे मेट्रो लाइन-2A से भी जोड़ता है. इस एकीकृत नेटवर्क का लाभ यह है कि यात्रियों को अलग-अलग परिवहन साधनों को बदलने की परेशानी नहीं होगी और वे एक ही सिस्टम के भीतर पूरी मुंबई का सफर कर सकेंगे.
इस मेट्रो लाइन के शुरू होने का सबसे बड़ा असर दहिसर टोल नाका और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर देखने को मिलेगा. बेहतर कनेक्टिविटी के कारण सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक जाम में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है. विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 20 से 30 प्रतिशत यात्री अब सड़क परिवहन छोड़कर मेट्रो का रुख करेंगे, जिससे छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के कीमती समय की बचत होगी.
यात्रियों के सफर को सुगम बनाने के लिए स्टेशनों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं दी गई हैं. इसमें लिफ्ट, एस्केलेटर, सीसीटीवी निगरानी और भीड़ प्रबंधन के आधुनिक सिस्टम शामिल हैं. अच्छी रोशनी वाले स्टेशन और स्पष्ट साइनबोर्ड न केवल सुरक्षा बढ़ाते हैं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए भी यात्रा को सुलभ (यूनिवर्सल एक्सेसिबिलिटी) बनाते हैं.
मुंबई मेट्रो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम है. इलेक्ट्रिक संचालन होने के कारण यह निजी वाहनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करती है. इन ट्रेनों में 'रिजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम' लगा है, जो ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को वापस बिजली में बदलकर दोबारा उपयोग करता है. इसके अलावा, स्टेशनों को ऊर्जा-कुशल लाइटिंग और 'सेंट्रलाइज्ड SCADA' मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस किया गया है, जो बिजली की बर्बादी को रोकने में मदद करता है.
मेट्रो लाइन-9 का यह पहला चरण पूरे 'MBVV' मेट्रो कॉरिडोर के लिए एक मजबूत नींव है. इससे न केवल यात्रा सुरक्षित और आरामदायक होगी, बल्कि शोर और कंपन नियंत्रण तकनीक के कारण आसपास के वातावरण पर भी बुरा असर नहीं पड़ेगा. कम यात्रा समय और घटता प्रदूषण मुंबई को एक अधिक टिकाऊ और विकसित ग्लोबल सिटी बनाने की दिशा में एक बड़ा निवेश है.
-भारत एक्सप्रेस

