Bihar News: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई और अब 30 जुलाई को यहां उपचुनाव होना है.
नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 13 जुलाई तक पर्चा दाखिल कर सकते हैं.
बीजेपी का गढ़ और चुनौती
बांकीपुर सीट को बीजेपी का सबसे मजबूत किला माना जाता है. 1995 से लगातार इस क्षेत्र पर पार्टी का कब्जा रहा है. पहले पटना पश्चिम सीट के नाम से जानी जाने वाली इस सीट पर नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन ने लगातार जीत दर्ज की. नितिन नवीन पांच बार विधायक रहे और 2025 में उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी.
विपक्ष की कोशिशें
कांग्रेस और आरजेडी ने कई बार इस सीट पर बीजेपी को चुनौती देने की कोशिश की लेकिन हर बार नाकाम रहे. 2020 में शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे यश सिन्हा को उतारा गया जिन्हें महागठबंधन का समर्थन मिला था फिर भी जीत नहीं मिली. 2015 में भी आरजेडी-जेडीयू और कांग्रेस मिलकर बीजेपी को नहीं हरा सके. यही वजह है कि इस उपचुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं.
सियासी समीकरण
बांकीपुर में करीब 3.91 लाख मतदाता हैं. इनमें सबसे ज्यादा कायस्थ समुदाय के वोटर हैं जो बीजेपी का कोर वोटबैंक माने जाते हैं. इनके अलावा वैश्य, ब्राह्मण और राजपूत भी बीजेपी के साथ खड़े रहते हैं. दूसरी ओर यादव और मुस्लिम वोटर आरजेडी के पक्ष में जाते हैं. चंद्रवंशी, दलित और अन्य समुदाय भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं. आरजेडी किसी नए समीकरण की तलाश में है जबकि प्रशांत किशोर के उतरने से बीजेपी के वोटबैंक में सेंध लगने की आशंका जताई जा रही है.
सम्राट चौधरी की परीक्षा
बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी के लिए यह पहला बड़ा चुनाव है. बांकीपुर उपचुनाव को उनके नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज का जनमत संग्रह माना जा रहा है. पार्टी के लिए सिर्फ जीतना ही नहीं बल्कि जीत का अंतर बनाए रखना भी चुनौती है. खासकर तब जब ब्राह्मण वोटरों में नाराजगी की चर्चा है और पीके के मैदान में उतरने से सवर्ण वोट खिसक सकते हैं.
प्रशांत किशोर की एंट्री
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी. इससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. पीके ने हाल के दिनों में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नीट छात्र मामला और भोजपुर मुठभेड़ जैसे मुद्दों को उठाकर माहौल बनाया है. उनके लिए यह चुनाव पार्टी की ताकत दिखाने का पहला मौका है.
मुद्दों पर टकराव
बांकीपुर उपचुनाव में स्थानीय से ज्यादा राज्य स्तरीय मुद्दे हावी रहेंगे. बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और सरकार के अधूरे वादे चुनावी प्रचार का हिस्सा बन चुके हैं. बीजेपी इसे अपनी उपलब्धियों का समर्थन मान रही है जबकि आरजेडी इसे सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा बता रही है.
बीजेपी और आरजेडी का दावा
बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि बांकीपुर में पार्टी का वोट कोई नहीं काट सकता और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में जीत पक्की है. वहीं आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जनता का गुस्सा इस चुनाव में साफ दिखेगा और सरकार को करारा झटका मिलेगा.
उपचुनाव का महत्व
बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है. यह एनडीए सरकार के प्रदर्शन, विपक्ष के जन मुद्दों और प्रशांत किशोर की नई राजनीतिक ताकत की परीक्षा बन गया है. नतीजे से तय होगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी.
-भारत एक्सप्रेस

