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अब डॉलर की नहीं होगी जरूरत? भारत-इंडोनेशिया ने उठाया ये बड़ा कदम, जानें पूरी जानकारी

अब डॉलर की नहीं होगी जरूरत? भारत-इंडोनेशिया ने उठाया ये बड़ा कदम, जानें पूरी जानकारी

Bharat24 6 days ago

India Indonesia Deal: भारत और इंडोनेशिया ने अपने आर्थिक और डिजिटल रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक के बाद दोनों देशों ने क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट सिस्टम और लोकल करेंसी ट्रांजैक्शन (LCT) को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है.

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच भुगतान पहले से आसान, तेज और सस्ता हो सकेगा.

संयुक्त बयान के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक इंडोनेशिया इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है. साथ ही डॉलर पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम की जा सकेगी.

क्या है क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट?

अभी अगर कोई भारतीय पर्यटक इंडोनेशिया में खरीदारी करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कार्ड या विदेशी मुद्रा के जरिए भुगतान करना पड़ता है. इसमें अतिरिक्त बैंक चार्ज और करेंसी बदलने का खर्च भी लगता है.

नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय पर्यटक भारत में इस्तेमाल होने वाले UPI से इंडोनेशिया के QR कोड को स्कैन करके सीधे भुगतान कर सकेंगे. इसी तरह इंडोनेशिया के नागरिक भारत में अपने देश के QR सिस्टम से पेमेंट कर पाएंगे. इससे भुगतान दोनों देशों की स्थानीय मुद्रा में होगा और डॉलर की जरूरत काफी कम हो जाएगी.

लोकल करेंसी ट्रांजैक्शन (LCT) क्या है?

लोकल करेंसी ट्रांजैक्शन का मतलब है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार का भुगतान सीधे भारतीय रुपये और इंडोनेशियाई रुपिया में किया जाएगा. फिलहाल ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर के जरिए होता है.

यानी पहले रुपये को डॉलर में और फिर डॉलर को रुपिया में बदला जाता है. इस प्रक्रिया में अतिरिक्त खर्च और विनिमय दर का जोखिम बढ़ जाता है. नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया आसान होगी और कारोबारियों का समय व पैसा दोनों बचेंगे.

किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?

पर्यटकों को राहत मिलेगी

भारतीय पर्यटकों को इंडोनेशिया में खरीदारी के लिए डॉलर साथ रखने की जरूरत कम होगी. वे QR स्कैन करके तुरंत भुगतान कर सकेंगे और करेंसी एक्सचेंज का अतिरिक्त खर्च भी बचेगा.

छात्रों को सुविधा मिलेगी

भारत और इंडोनेशिया में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए फीस जमा करना और रोजमर्रा के खर्च का भुगतान पहले से आसान हो जाएगा.

व्यापारियों और MSME को लाभ

छोटे और मध्यम उद्योगों को डॉलर पर कम निर्भर रहना पड़ेगा. लेनदेन की लागत घटेगी और भुगतान तेजी से होने के कारण व्यापार को भी फायदा मिलेगा.

निवेशकों के लिए भी अच्छी खबर

स्थानीय मुद्रा में लेनदेन होने से विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा. इससे दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ने की संभावना है.

भारत के लिए क्यों है अहम?

यह कदम भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और स्थानीय मुद्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ाने की नीति का हिस्सा माना जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत कई देशों के साथ UPI और लोकल करेंसी में भुगतान की व्यवस्था विकसित कर रहा है. इंडोनेशिया के साथ यह समझौता दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की डिजिटल और आर्थिक मौजूदगी को और मजबूत करेगा.

डॉलर पर निर्भरता होगी कम

अगर दोनों देशों के बीच व्यापार रुपये और रुपिया में होने लगता है, तो कारोबारियों को हर बार डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे भुगतान की लागत कम होगी और करेंसी बदलने से जुड़ा जोखिम भी घटेगा. दुनिया के कई देश अब आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्रा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं. भारत और इंडोनेशिया की यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

सबांग पोर्ट पर भी बढ़ेगा सहयोग

दोनों देशों ने इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट के विकास में भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है. इस परियोजना की रूपरेखा, निवेश और कामकाज के मॉडल पर दोनों देश मिलकर आगे काम करेंगे.

सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचे प्रांत में मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास स्थित है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है. पश्चिम एशिया से पूर्वी एशिया तक जाने वाले बड़ी संख्या में तेल और मालवाहक जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं. ऐसे में इस पोर्ट का विकास भारत और इंडोनेशिया दोनों के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Bharat24