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मानसून के बीच किसानों के लिए खुशखबरी, अब नहीं होगी खाद की किल्लत! होर्मुज से आ रहे यूरिया-DAP लदे जहाज

मानसून के बीच किसानों के लिए खुशखबरी, अब नहीं होगी खाद की किल्लत! होर्मुज से आ रहे यूरिया-DAP लदे जहाज

Bharat24 6 days ago

देश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार ने बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुलने के बाद खाद और उसके कच्चे माल से लदे 15 जहाज सुरक्षित भारत की ओर रवाना हो चुके हैं.

इन जहाजों में यूरिया, DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) और सल्फर जैसे जरूरी उर्वरक और कच्चा माल है.

सरकार का कहना है कि इससे खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और सप्लाई सामान्य बनी रहेगी.

15 जहाज सुरक्षित भारत पहुंचे

उर्वरक विभाग के मुताबिक, यूरिया, DAP और सल्फर लेकर आ रहे सभी जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं. ये जहाज 28 फरवरी के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट में फंस गए थे. अब रास्ता खुलने के बाद इनकी आवाजाही फिर से शुरू हो गई है.

खरीफ सीजन के लिए पहले से तैयार सरकार

सरकार ने खरीफ सीजन की जरूरत को देखते हुए पहले से ही खाद का बड़ा स्टॉक तैयार कर लिया है.

  • अनुमानित जरूरत: 38.39 मिलियन टन
  • उपलब्ध स्टॉक: 19.76 मिलियन टन

यानी सरकार के पास सीजन की कुल अनुमानित जरूरत का 51% से ज्यादा खाद पहले से मौजूद है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा करीब 33% था.

कई देशों से मंगाई गई खाद

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वैश्विक सप्लाई में आई दिक्कतों के बावजूद सरकार ने पहले से योजना बनाकर और कई देशों से आयात करके खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की.

सरकार के अनुसार:

  • यूरिया ओमान, मलेशिया, वियतनाम, नाइजीरिया, रूस, मिस्र और अल्जीरिया से मंगाया गया.
  • DAP और NPK रूस, मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब और अमेरिका से वैकल्पिक समुद्री मार्गों के जरिए आयात किए गए.

पश्चिम एशिया के तनाव से बढ़ी थी चिंता

फरवरी में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी. इससे कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी.

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद जून के मध्य से इस समुद्री मार्ग पर धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई.

घरेलू यूरिया उत्पादन भी सामान्य

मंत्रालय ने बताया कि संकट के दौरान उर्वरक संयंत्रों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे उत्पादन घट गया था. अब गैस की आपूर्ति पूरी तरह बहाल हो चुकी है और देश के सभी यूरिया प्लांट अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं.

इससे आने वाले दिनों में किसानों को खाद की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Bharat24