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अंधविश्वास का खौफनाक अंत: सांप के डसने के बाद 24 घंटे झाड़-फूंक में उलझे रहे परिजन, बुजुर्ग ने तोड़ा दम

अंधविश्वास का खौफनाक अंत: सांप के डसने के बाद 24 घंटे झाड़-फूंक में उलझे रहे परिजन, बुजुर्ग ने तोड़ा दम

Bhaskar Digital 1 week ago

तरपुर। छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र के ग्राम दोनी में अंधविश्वास के चलते एक 71 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई। खेत पर सोते समय बुजुर्ग को एक जहरीले सांप ने काट लिया था, लेकिन परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय करीब 24 घंटे तक अलग-अलग जगहों पर झाड़-फूंक कराते रहे।

जब हालत बेहद गंभीर हो गई और वे मरीज को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

खेत पर सोते समय काटा था सांप ने

जानकारी के अनुसार, गुरुवार की रात टरिया कुशवाहा (71 वर्ष) अपने खेत पर बने मकान की दुगई में सो रहे थे। इसी दौरान किसी जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। नींद खुलने पर उन्होंने खुद इस बात की जानकारी अपने परिवार वालों को दी। सांप काटने की बात सुनते ही परिजन घबरा गए, लेकिन उन्होंने सूझबूझ दिखाने के बजाय अंधविश्वास का रास्ता चुना। वे बुजुर्ग को अस्पताल ले जाने के बजाय पास के ही ग्राम सिमरदा ले गए, जहां एक ओझा से उनकी झाड़-फूंक कराई गई।

24 घंटे तक भटकते रहे परिजन

सिमरदा में जब बुजुर्ग की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो परिजन उन्हें राहत दिलाने के लिए कुछ अन्य जगहों पर भी झाड़-फूंक कराने ले गए। इस तरह इलाज के अभाव में करीब 24 घंटे का बेहद कीमती समय बर्बाद हो गया। जब टरिया कुशवाहा की हालत लगातार बिगड़ने लगी और वे अधमरी स्थिति में पहुंच गए, तब जाकर परिजनों की आंखें खुलीं और वे उन्हें जिला अस्पताल लेकर भागे। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उनकी नब्ज जांची और उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस लापरवाही के बाद से पूरे परिवार में मातम और कोहराम मचा हुआ है।

डॉक्टर की अपील

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. राजकुमार अवस्थी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए आम जनता से एक बेहद जरूरी अपील की है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु अपने बिलों से बाहर निकलते हैं। ऐसे में यदि किसी को सांप काट ले, तो झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर समय गंवाना सीधे मौत को बुलावा देना है।

डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि हर सरकारी अस्पताल में सांप के जहर को बेअसर करने वाला ‘एंटी स्नेक वेनम’ (ASV) इंजेक्शन और उचित उपचार मुफ्त उपलब्ध होता है। समय पर इलाज मिलने से ज्यादातर मरीजों की जान आसानी से बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में भी बुजुर्ग को समय रहते अस्पताल लाया जाता, तो उनकी जान बचने की उम्मीद बहुत ज्यादा थी।

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