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अयोध्या राम मंदिर की तिजोरी में कितना है कुबेर का खजाना? ट्रस्ट की बैठक में खुली आमदनी और खर्च की पूरी कुंडली, जानें कितना है सोना-चांदी

अयोध्या राम मंदिर की तिजोरी में कितना है कुबेर का खजाना? ट्रस्ट की बैठक में खुली आमदनी और खर्च की पूरी कुंडली, जानें कितना है सोना-चांदी

Bhaskar Digital 3 months ago

अयोध्या : राम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद सोमवार, 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम और पहली बैठक आयोजित की गई।

इस उच्च स्तरीय बैठक में मंदिर की कुल आय, विकास कार्यों पर हुए खर्च और संपत्तियों का पाई-पाई का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक रूप से सार्वजनिक कर दिया गया है। साल 2020 में ट्रस्ट की स्थापना होने के बाद से लेकर अब तक, यानी पिछले 6 वर्षों में देश-विदेश के भक्तों ने रामलला के चरणों में दिल खोलकर समर्पण किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन 6 सालों में मंदिर को कुल 3,846 करोड़ रुपये का भारी-भरकम दान और चढ़ावा प्राप्त हुआ है, जिसमें 3,264 करोड़ रुपये का सीधा दान और 582 करोड़ रुपये का नियमित चढ़ावा शामिल है। इसी राशि से भव्य मंदिर का निर्माण, परिसर का संचालन और अन्य बड़े विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

प्रसाद से लेकर सुरक्षा और शू रैक तक… एक साल में खर्च हुए 91.76 करोड़ रुपये

राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा जारी किए गए ताजा वित्तीय विवरण के अनुसार, केवल एक वित्तीय वर्ष (2025-26) के भीतर प्रसाद, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर कुल 91.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किए गए इस खर्च का पूरा ब्रेकअप बेहद दिलचस्प है। इसमें रामलला के भोग प्रसाद और दैनिक पूजा-अर्चना पर 12.85 करोड़ रुपये, परिसर की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था पर 11.49 करोड़ रुपये और मंदिर के भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रमों पर 10.48 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाए गए लॉकर सिस्टम पर 4.43 करोड़ रुपये और शू रैक (जूता रखने की जगह) की व्यवस्था पर 2.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, ट्रस्ट के कार्यालय संचालन और प्रशासनिक खर्चों के मद में 2.22 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।

निधि समर्पण और निर्माण कार्य: अब तक कहां और कितना लगा पैसा?

ट्रस्ट की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक मंदिर के निर्माण और दैनिक संचालन के लिए मुख्य रूप से दो माध्यमों से धनराशि जुटाई गई है। इसमें पहला जरिया राष्ट्रव्यापी 'निधि समर्पण अभियान' और कॉर्पस फंड रहा, जबकि दूसरा जरिया भक्तों द्वारा दानपात्रों में डाला गया नियमित चढ़ावा है। निधि समर्पण और कॉर्पस दान के माध्यम से ट्रस्ट को अब तक कुल 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जिसमें से मुख्य मंदिर के निर्माण और अन्य बुनियादी विकास कार्यों पर 2,370 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है। वहीं, मंदिर के शुरुआती दिनों से लेकर 31 मार्च 2026 तक दानपात्रों और अन्य स्रोतों के जरिए कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला। इस चढ़ावे की राशि में से 391 करोड़ रुपये मंदिर के रोजमर्रा के ऑपरेशनल (संचालन) खर्चों में लगाए गए हैं और शेष बची हुई रकम को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए बैंक खातों में जमा कर दिया गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 का पूरा ब्योरा: जानिए कहां से हुई 250.04 करोड़ की बंपर आय

1 अप्रैल 2025 से लेकर 31 मार्च 2026 तक के वित्तीय विवरण के अनुसार, इस एक साल की अवधि में ट्रस्ट की कुल आय और खर्च का आंकड़ा काफी बड़ा है, हालांकि इस डेटा की अभी अंतिम ऑडिटिंग होना बाकी है। इस एक साल में ट्रस्ट को कुल 250.04 करोड़ रुपये की मोटी आय हुई है, जिसमें बैंकों से मिला ब्याज भी शामिल है। आय के प्रमुख स्रोतों की बात करें तो भक्तों के स्वैच्छिक योगदान से 98.24 करोड़ रुपये, मंदिर परिसर में रखे दान पात्रों (कैश) से 66.55 करोड़ रुपये और विभिन्न दान काउंटरों से 21.05 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही, डिजिटल माध्यम यानी ऑनलाइन डोनेशन से 9.70 करोड़ रुपये और विदेशी मुद्रा (FCRA) के जरिए 0.94 करोड़ रुपये का योगदान मिला है। इस भारी-भरकम फंड की वजह से ट्रस्ट को सिर्फ बैंकों में जमा राशि के ब्याज से ही 151.80 करोड़ रुपये की तगड़ी कमाई हुई है।

जमीन की खरीद और कैनोपी निर्माण पर हुआ करोड़ों का पूंजीगत खर्च

इसी वित्तीय वर्ष (2025-26) के दौरान मंदिर ट्रस्ट द्वारा लगभग 10 अलग-अलग तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 422.74 करोड़ रुपये का पूंजीगत (Capital) खर्च किया गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा यानी 375.40 करोड़ रुपये सीधे तौर पर भव्य मंदिर के मुख्य निर्माण कार्यों पर खर्च किया गया। मंदिर परिसर के विस्तार के लिए ट्रस्ट ने कुल 14 रजिस्ट्रियों के जरिए 1.12 लाख स्क्वायर फीट (यानी लगभग 2.57 एकड़) अतिरिक्त जमीन खरीदी, जिस पर कुल 21.53 करोड़ रुपये व्यय हुए (जिसमें मुख्य भूमि मूल्य 20.16 करोड़ रुपये है)। इसके अलावा, प्रसिद्ध निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (L&T) द्वारा बनाई जा रही विशेष कैनोपी के निर्माण पर 9.81 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अन्य बुनियादी सुविधाओं के तहत यात्री स्वागत केंद्र पर 4.83 करोड़ रुपये, राम निवास के समीप डॉरमेट्री निर्माण पर 2.76 करोड़ रुपये और बाग बिजेसी में चल रहे निर्माण कार्यों पर 2.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

दैनिक संचालन और व्यवस्थाओं का मदवार खर्च

रामलला के दरबार को सुचारू रूप से चलाने, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने और विभिन्न उत्सवों को मनाने के लिए 31 अलग-अलग मदों में कुल 91.76 करोड़ रुपये का परिचालन खर्च हुआ है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • भोग प्रसाद और पूजा: 12.85 करोड़ रुपये
  • सुरक्षा सेवाएं: 11.49 करोड़ रुपये
  • मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम: 10.48 करोड़ रुपये
  • अन्न क्षेत्र (श्रद्धालुओं के लिए भोजन व्यवस्था): 9.26 करोड़ रुपये
  • मंदिर संचालन और रखरखाव: 8.98 करोड़ रुपये
  • सफाई और हाउसकीपिंग: 4.91 करोड़ रुपये
  • लॉकर सुविधा: 4.43 करोड़ रुपये
  • बिजली का खर्च: 4.41 करोड़ रुपये
  • कर्मचारी लाभ और मानदेय व्यय: 2.59 करोड़ रुपये
  • रिपेयर और मेंटेनेंस: 2.45 करोड़ रुपये
  • ऑफिस और प्रशासनिक खर्च: 2.22 करोड़ रुपये
  • जूता रैक (शू रैक) सुविधा: 2.05 करोड़ रुपये
  • विशेष आयोजनों और उत्सवों पर खर्च: 1.84 करोड़ रुपये
  • श्रद्धालु कल्याण गतिविधियां: 1.39 करोड़ रुपये

रामलला के खजाने में जमा है कुंतलों सोना और चांदी, सीए करते हैं जांच

नकद और ऑनलाइन ट्रांसफर के अलावा, देश और दुनिया भर के रामभक्तों ने रामलला के दरबार में सोने-चांदी और बहुमूल्य रत्नों की जमकर बौछार की है। ट्रस्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, अब तक कुल 2,926 कीमती वस्तुएं भेंट के रूप में मिल चुकी हैं, जिनका पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर साल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के माध्यम से बकायदा फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) कराया जाता है। चांदी की स्थिति: 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट को सीधे तौर पर कुल 669.653 किलो चांदी की वस्तुएं भेंट में मिली थीं। इसके बाद भारत सरकार की आधिकारिक टकसाल (SPMCIL) में इन वस्तुओं को गलाने और रिफाइनिंग की प्रक्रिया से गुजारा गया, जिससे 99.99% शुद्धता वाली 43 चांदी की चमचमाती ईंटें तैयार हुईं, जिनका कुल वजन 849.272 किलो है। इस तरह वर्तमान में ट्रस्ट के पास कुल मिलाकर 1,518.925 किलो (एक टन से भी अधिक) चांदी सुरक्षित रखी है। सोने की स्थिति: 31 मार्च 2026 की कट-ऑफ डेट तक राम मंदिर ट्रस्ट को कुल 32.259 किलो सोने से बनी विभिन्न बहुमूल्य वस्तुएं और आभूषण प्राप्त हुए हैं। सुरक्षा और मूल्यांकन के लिहाज से इन सभी सोने की धातुओं को गलाकर बिस्कुट या छड़ों (Bars) के रूप में तब्दील कर दिया गया है, जिन्हें बेहद सुरक्षित बैंक लॉकरों में रखा गया है।

जानिए देश के किस बड़े बैंक में जमा है ट्रस्ट का कितना पैसा?

लगातार चल रहे भव्य निर्माण कार्यों और विशाल आयोजनों पर पानी की तरह पैसा बहने के बाद भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की माली हालत बेहद मजबूत और अभेद्य है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, ट्रस्ट का कुल 1,876.30 करोड़ रुपये का विशाल फंड देश के विभिन्न प्रतिष्ठित बैंकों के खातों में सुरक्षित जमा है। इसका पूरा ब्योरा इस प्रकार है:

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): 791.04 करोड़ रुपये
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB) फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): 652.88 करोड़ रुपये
  • बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): 327.30 करोड़ रुपये
  • म्यूचुअल फंड निवेश: 87.00 करोड़ रुपये
  • ऑटो स्वीप और बचत खाते: क्रमशः 10.87 करोड़ रुपये और 4.77 करोड़ रुपये
  • विदेशी अंशदान (FCRA) बैंक बैलेंस: 1.67 करोड़ रुपये
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