बलरामपुर : हर्रैया सतघरवा क्षेत्र अंतर्गत सोहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य की बरहवा रेंज के ग्राम पंचायत गौरामाफी में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। छत पर खेल रही 11 वर्षीय बच्ची को लंगूर बंदर ने धक्का दे दिया, जिससे गिरकर उसकी मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरामाफी निवासी अशोक की पुत्री शुभि शुक्रवार शाम करीब 5 बजे घर की छत पर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान अचानक आए लंगूर बंदर ने उसे धक्का दे दिया, जिससे वह नीचे गिर गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन तत्काल उसे निजी वाहन से संयुक्त अस्पताल बलरामपुर ले गए, जहां सिर में गंभीर चोट होने के कारण डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए बहराइच रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया।
मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। शुभि की मां कृष्णावती ने बताया कि वह सात बच्चों में चौथे नंबर पर थी। पिता अशोक ने पोस्टमार्टम कराए बिना ही बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले छह माह से क्षेत्र में लंगूर बंदरों का आतंक बना हुआ है। गांव के रमेश, वसीम, प्रभुदयाल, लल्लन, मिथुन, रवि, विकास, आदर्श, लालजी, शिवकुमार, बालगोविंद, किशोरी, कमला, रंजीत और नंदराम समेत अन्य लोगों ने बताया कि बंदरों ने अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों को काटकर घायल कर दिया है। कई महिलाओं पर हमलों में हाथ, पैर और कमर तक फ्रैक्चर हो चुके हैं।
इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर वन विभाग से बंदरों को पकड़वाने की मांग की। उनका कहना है कि गौरामाफी के अलावा फतेहरा, पूरनपुर, भुजेहरा, लछुआपुर, कमदा, गुलरिहा और हिसामपुर सहित आसपास के गांव भी बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं। दो दर्जन से अधिक लंगूर आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं।
शनिवार को रेंजर बृजेश सिंह परमार टीम के साथ गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए ढांढस बंधाया। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द ही गांव में पिंजरा लगाकर लंगूरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाएगा। साथ ही लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई।

