Parshurampur, Basti : सरकार की बहुचर्चित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को गरीब महिलाओं के लिए वरदान बताया जाता है, लेकिन परशुरामपुर क्षेत्र के ग्राम घूरनपुर से सामने आई एक हकीकत इस दावे को कठघरे में खड़ा कर रही है।
यहां अनुसूचित जाति की महिला दुर्गावती, पत्नी कृष्ण कुमार, के साथ जो हुआ, वह न सिर्फ लापरवाही बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की भी कहानी कहता है।
दुर्गावती ने 4 मई 2018 को इंडेन गैस एजेंसी, परशुरामपुर में उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में उसे धुएं से छुटकारा मिलेगा और वह भी साफ-सुथरे ईंधन से खाना बना सकेगी। लेकिन हकीकत में उसे सात साल तक एजेंसी और संबंधित कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े। हर बार कल आना, फाइल चल रही है जैसे बहाने मिलते रहे।
हैरानी की बात तब सामने आई जब 25 मार्च 2026 को उसे गैस कनेक्शन की पासबुक दी गई, लेकिन पासबुक पर जारी तिथि 4 मई 2023 दर्ज दिखाई गई। महिला को न तो सिलेंडर मिला और न ही चूल्हा (स्टोव)। यानी कागजों में उसे योजना का लाभ मिल चुका है, लेकिन जमीन पर आज भी वह उसी पुराने धुएं भरे चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर है।
दुर्गावती का कहना है कि लकड़ी और उपलों के धुएं से उसकी आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होती है। "सरकार कहती है धुएं से मुक्ति मिलेगी, लेकिन हमें तो अभी तक सिर्फ कागज ही मिला है," उसने दर्द भरे स्वर में कहा।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक महिला की समस्या नहीं, बल्कि उन तमाम गरीब परिवारों की कहानी है जो योजनाओं के नाम पर सिर्फ कागजी लाभ पा रहे हैं। सवाल यह भी है कि बिना सिलेंडर और चूल्हा दिए कनेक्शन पूरा कैसे दिखा दिया गया। क्या कहीं योजना के नाम पर भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा है?
जिम्मेदार अधिकारी और एजेंसी आखिर किसके संरक्षण में काम कर रहे हैं? पीड़ित महिला ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। साथ ही पीड़ित महिला को तत्काल गैस सिलेंडर और चूल्हा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
यह घटना उज्ज्वला योजना की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार करोड़ों कनेक्शन देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर लाभार्थी आज भी धुएं में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। पीड़िता ने शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत की जानकारी मिलते ही गैस एजेंसी के लोग महिला को धमकाने का काम कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है क्या दुर्गावती को उसका हक मिलेगा या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाएगा।

