- बच्चा चोरी और प्रसूता की मौत के मामलों से दहला जिला, कानून के शिकंजे में आए सफेदपोश अपराधी
- चिकित्सा जगत के कलंक: कहीं लगी पांच लाख में मासूमों की बोली, तो कहीं लापरवाही ने ली मां की जान
Sitapur : जनपद सीतापुर में इन दिनों चंद तथाकथित और झोलाछाप चिकित्सकों ने अपने लालच के चलते पूरे चिकित्सा विभाग को शर्मसार कर दिया है। जिले में मानवता को तार-तार करने वाले दो बड़े मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। एक ओर महोली क्षेत्र में अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वाले कथित डॉक्टर को अंतरजनपदीय बच्चा चोरी और मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के संगीन मामले में बरेली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं दूसरी ओर शहर सीतापुर के बट्सगंज स्थित आरोग्यम चिकित्सालय में कमीशन और घोर लापरवाही के चलते एक प्रसूता की जान चली गई, जिसके बाद प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल संचालक सहित चार डॉक्टरों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इन दोनों घटनाओं ने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर फल-फूल रहे अवैध और संवेदनहीन कारोबार की पोल खोलकर रख दी है।
मिशन मासूम: 5 लाख रुपये में बिकते थे चोरी के बच्चे, उर्दौली का कथित डॉक्टर संजय विश्वास गिरफ्तार
महोली कोतवाली क्षेत्र के उर्दौली में स्थित स्वर्ण लता मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक और उसके गिरोह के तार अंतरजनपदीय बच्चा चोरी और मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। बरेली जनपद की आंवला व मनौना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने महोली से कथित डॉक्टर संजय विश्वास समेत तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
यह कार्रवाई बरेली के मनौना श्याम मंदिर से अगवा हुए डेढ़ वर्षीय मासूम बालक ऋषभ की बरामदगी के बाद शुरू हुई थी। पूछताछ में इस गिरोह के तार सीतापुर, लखीमपुर खीरी और बदायूं जिलों से जुड़े पाए गए।
जांच में सामने आया है कि गिरोह का सक्रिय सदस्य संजय विश्वास मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और वह पिछले कई वर्षों से महोली के उर्दौली क्षेत्र में अवैध रूप से विश्वास क्लीनिक का संचालन कर स्वास्थ्य व्यवस्था से खिलवाड़ कर रहा था। पुलिस ने संजय विश्वास के साथ उसके साथी केशवराम और सीता को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मानव तस्करी गिरोह की मास्टरमाइंड सीता नाम की महिला है।
यह गिरोह विभिन्न धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से छोटे बच्चों को अगवा कर निसंतान दंपतियों या अन्य खरीदारों को 5 लाख रुपये तक में बेचता था। पुलिस इस मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और अन्य संदिग्धों पर जांच जारी है।

कमीशन के लालच में जान से खिलवाड़: आरोग्यम हॉस्पिटल के संचालक समेत 4 डॉक्टरों पर केस दर्ज
इधर, शहर सीतापुर के बट्सगंज स्थित आरोग्यम हॉस्पिटल में कमीशन के लालच और तीमारदारों की मजबूरी का फायदा उठाकर जान से खिलवाड़ करने वाले डॉक्टरों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एक प्रसूता की मौत के मामले में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद कोतवाली शहर में अस्पताल के संचालक समेत चार डॉक्टरों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार देशमणि की तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत अस्पताल के संचालक डॉ. जगत प्रकाश पांडेय, बीएएमएस चिकित्सक डॉ. नयनका पांडेय, सर्जन डॉ. तौसीफ इलाही और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. गोविंद प्रकाश को नामजद कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पूरा घटनाक्रम पिपरी मिर्जापुर से जुड़ा है, जहां के निवासी हरिओम की पत्नी अंजनी को प्रसव के लिए आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने कमीशन और मोटी रकम के लालच में जबरन ऑपरेशन किया, जिसके बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तो अस्पताल प्रशासन ने मरीज को लखनऊ रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी सदर, स्त्री रोग विशेषज्ञ और उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच समिति ने अस्पताल के अभिलेखों, प्रसूता के चिकित्सा इतिहास और इलाज में शामिल डॉक्टरों के बयानों की गहन जांच की, जिसमें गंभीर लापरवाही सामने आई। रिपोर्ट में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला गया कि प्रसूता की मौत का मुख्य कारण इलाज में बरती गई क्रिमिनल लापरवाही थी, जिसके बाद इन सफेदपोश आरोपियों पर कानून का शिकंजा कस गया है।

