नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस बीच पिछले 25 वर्षों से सीबीएसई की कॉपियां जांच रहे वरिष्ठ परीक्षक जी.के. श्रीवास्तव ने नई मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि बिना पर्याप्त तैयारी के लागू की गई इस डिजिटल प्रणाली ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
एक इंटरव्यू में वरिष्ठ परीक्षक ने बताया कि शिक्षकों को इस संवेदनशील डिजिटल सिस्टम के लिए केवल 7 से 10 दिन की ट्रेनिंग दी गई, जो पूरी तरह अपर्याप्त थी। उन्होंने कहा कि कई अनुभवी शिक्षक तकनीकी प्रक्रिया को ठीक से समझ ही नहीं पाए। कॉपी जांच शुरू होते ही अंदाजा हो गया था कि मूल्यांकन पूरी तरह सटीक नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि स्कैनिंग की खराब गुणवत्ता के कारण कई उत्तर पुस्तिकाएं स्क्रीन पर धुंधली दिखाई दे रही थीं। विशेषकर फिजिक्स और गणित जैसे विषयों में फॉर्मूले और स्टेप्स स्पष्ट नहीं दिख रहे थे, जिससे परीक्षकों को अनुमान के आधार पर नंबर देने पड़े। उन्होंने कहा कि कई मामलों में स्टेप-मार्किंग प्रभावित हुई और छात्रों के अंक कम हो गए।
वरिष्ठ परीक्षक के मुताबिक, सर्वर की तकनीकी समस्याओं ने भी मूल्यांकन प्रक्रिया को बाधित किया। कई बार एक पेज खुलने के बाद दूसरा पेज लोड होने में काफी समय लग रहा था। कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिका के पन्ने गायब मिले, जबकि कुछ पेज स्क्रीन पर पूरी तरह ब्लैंक दिखाई दिए। उन्होंने दावा किया कि रायपुर और रांची जैसे केंद्रों से स्कैन हुई कॉपियों में पन्ने गायब होने की शिकायतें सामने आईं।
उन्होंने पुराने मैनुअल सिस्टम और नई डिजिटल प्रणाली की तुलना करते हुए कहा कि पहले कॉपियों की कई स्तरों पर री-चेकिंग होती थी, जिससे गलती की संभावना बेहद कम रहती थी। लेकिन नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था में जांच की परतें कम कर दी गई हैं, जिससे त्रुटियों की आशंका बढ़ गई है।
श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि कई मेधावी छात्र, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें बोर्ड परीक्षा में उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। इससे छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और अभिभावकों में भी चिंता बढ़ी है।
हालांकि, सीबीएसई की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन छात्रों और अभिभावकों के बीच नई मूल्यांकन प्रणाली को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

