दिल्ली : दक्षिणी पश्चिम जिले के साइबर थाने की टीम ने ऑपरेशन साइबर हॉक-04 के तहत व्यापक कार्रवाई कर कई अंतर-राज्यीय साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी गिरोहों का पर्दाफाश किया है। इस अभियान में पुलिस ने कुल 57 मामलों में 113 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगी के जाल में फंसे थे।
पुलिस के अनुसार, इन गिरोहों ने करीब 22 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दिया है। जांच में पता चला कि आरोपियों के पास मिले ‘म्यूल खातों’ (बिचौलिया खातों) और मोबाइल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जो करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी में संलिप्त हैं। साथ ही, पुलिस ने इन गिरोहों के करोड़ों रुपये के लेन-देन का भी खुलासा किया है।
पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस ने नकद राशि-17 लाख रुपये-भी बरामद की है, साथ ही एक मर्सिडीज एस क्लास कार, छह लैपटॉप, 85 मोबाइल फोन, 11 पासबुक, 42 डेबिट कार्ड, 135 म्यूल सिम कार्ड, वाई-फाई राउटर और पैन कार्ड भी जब्त किए गए हैं। इन आरोपियों से पूछताछ और सत्यापन के लिए 488 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है।
टीम के मुताबिक, 7 अप्रैल को तजिंदर सिंह की शिकायत पर साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई, जो कनाडा में रहते हैं, भारत आने की योजना बना रहे थे। इस संबंध में, आरोपी गिरोह ने इंस्टाग्राम के एक फर्जी ऑनलाइन प्लेटफार्म “@flypedia.ca” के माध्यम से उन्हें अच्छी छूट का लालच देकर लगभग 3.8 लाख रुपये की फ्लाइट टिकट की ठगी की। इसके अलावा, उनसे वॉट्सएप पर एक यूएस मोबाइल नंबर के जरिए संपर्क किया गया।
साइबर टीम ने इस मामले की जांच में विशेष तकनीकी निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण, सोशल मीडिया विश्लेषण और स्थानीय खुफिया सूत्रों का सहारा लिया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पता चला कि दिल्ली, गोवा और मुंबई से एक गिरोह सक्रिय है, जो रियायती दरों पर हवाई टिकट बुक करने का झांसा देकर एनआरआई और भारतीय नागरिकों को ठग रहा है।
इस गिरोह का मास्टरमाइंड मृदुल जोशी (34 वर्ष) है, जो दिल्ली के पटेल नगर और गुरुग्राम में सक्रिय था। उसकी पहचान इंस्टाग्राम, वाट्सएप, गूगल और टीपीएस के माध्यम से की गई। मृदुल जोशी गोवा में एक काल सेंटर स्थापित कर इस घोटाले का संचालन कर रहा था।
छापेमारी के दौरान, गोवा और मुंबई में संदिग्ध डिवाइस भी सक्रिय पाए गए। पुलिस ने मृदुल जोशी को गिरफ्तार कर उसके पास से 47 लाख रुपये नकद, एक मर्सिडीज एस क्लास कार, सात मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक पीओएस मशीन और वाई-फाई राउटर भी जब्त किए हैं। इसके बाद, तकनीकी निगरानी के आधार पर और भी कई जगहों पर छापेमारी की गई।
इस पूरी कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क कितना व्यापक और जालसाजी का तरीका कितना शातिराना है। पुलिस का यह अभियान साइबर अपराधों के खिलाफ एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जो जनता को जागरूक करने और साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रहने का संदेश भी देता है।
चुनावी शपथपत्र में ममता का दावा : नहीं है घर और गाड़ी, दर्ज नहीं है एक भी केस

