- जिलाधिकारी बोले- मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी ही सफलता की असली कुंजी
- आज के मेधावी ही कल के राष्ट्र निर्माता- सम्मान समारोह में बोले डीएम
एटा : बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान में सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में भव्य समारोह का आयोजन किया गया।
माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 21 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों का गौरवपूर्ण अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह का सजीव प्रसारण भी देखा गया, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। एटा में आयोजित समारोह की अध्यक्षता जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने की।
जिलाधिकारी ने मेधावी छात्र-छात्राओं को ₹21,000 का प्रतीकात्मक चेक, मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आज के मेधावी विद्यार्थी ही कल के सफल वैज्ञानिक, प्रशासक, शिक्षक, चिकित्सक और राष्ट्र निर्माता बनेंगे। ईमानदारी, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच ही सफलता के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ें। शिक्षा केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और समाज के विकास का आधार भी है।
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक उद्बोधन का लाइव प्रसारण भी देखा गया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम, नवाचार, सकारात्मक सोच और उत्कृष्टता की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनके संबोधन ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया।
कार्यक्रम में सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख शीतलपुर पुष्पेन्द्र लोधी, ब्लॉक प्रमुख मारहरा रवि वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रमेश मौर्य, उप जिलाधिकारी भावना विमल, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. इंद्रजीत सिंह, शिक्षाधिकारी, प्रधानाचार्य, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
सम्मान पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे, जबकि अभिभावकों ने इसे अपने बच्चों की मेहनत और संघर्ष का सम्मान बताया।

