- भारतीय संस्कृति की विविधता उसकी वास्तविक शक्ति है
- ललित कला संस्थान में 'वाइब्रेंट गुजरात' का रंग, “बापू बाजार, फैशन और सिनेमा” में दिखाई कलात्मक विविधता
झाँसी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि इस आयोजन में विद्यार्थियों ने जिस सृजनात्मकता और प्रतिबद्धता के साथ गुजरात की संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है, वह अत्यंत सराहनीय है।
विविध कलात्मक विधाओं को एक ही मंच पर समेकित कर प्रस्तुत करना ललित कला संस्थान का सराहनीय प्रयास है। यह बात उन्होंने गुजरात स्थापना दिवस (01 मई) के अवसर पर ललित कला संस्थान, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा आयोजित दो दिवसीय कला उत्सव "वाइब्रेंट गुजरात: कला, संस्कृति और सृजन" का उद्घाटन करते हुए कही है।
मुख्य अतिथि राजबहादुर ने कहा कि "भारतीय संस्कृति की विविधता उसकी वास्तविक शक्ति है, और कला उसके सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों के रचनात्मक प्रयासों को जो मंच मिलता है, वह न केवल उनकी प्रतिभा को निखारता है, बल्कि समाज को भी संवेदनशील और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।"
विशिष्ट अतिथि सुनील कुमार सेन ने कहा कि "कला केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और उसमें मानवीय संवेदनाओं को जागृत करने का प्रभावी माध्यम है। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कलात्मक कृतियाँ उनके गंभीर प्रयास, सृजनात्मक सोच और सांस्कृतिक समझ का प्रमाण हैं, जो आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।"
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. श्वेता पांडेय ने कहा कि "यह उत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि गुजरात की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा को अनुभव करने का एक माध्यम है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी और दर्शक कला के माध्यम से उस परंपरा, रंगों और रचनात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकें, जो गुजरात की पहचान है।" कार्यक्रम के संचालक एवं कला अध्यापक गजेंद्र सिंह ने कहा कि "यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक प्रयोगात्मक मंच है, जहां वे अपनी कल्पनाओं को साकार रूप दे सकते हैं। आज के कार्यक्रम के आयोजन हेतु आभार डॉ सुनीता ने प्रस्तुत किया ।
प्रदर्शनी के अंतर्गत "बापू बाजार" विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा निर्मित विभिन्न कलात्मक कृतियों का प्रदर्शन किया गया। इस खंड में चित्रकला, पोस्टर, रंगोली, टेराकोटा, वस्त्रकला, गुजराती पाककला, क्राफ्ट वर्क ,रेजिन आर्ट,स्केच एवं लिप्पन आर्ट जैसी विधाओं को प्रस्तुत किया गया। इन कलाकृतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने गुजरात की पारंपरिक और समकालीन कला का सजीव चित्रण किया। इसके साथ ही विभिन्न स्टॉल्स पर कलाकृतियों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ बिक्री हेतु भी उपलब्ध कराया गया, जिससे विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में प्रेरणा मिली।
वॉलेंटियर्स बने कार्यक्रम की सफलता की मजबूत कड़ी बनते है।
प्रदर्शनी संचालन से लेकर व्यवस्थाओं के कुशल समन्वय तक, सभी स्वयंसेवकों ने पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ योगदान दिया। विशेष रूप से अक्षय कुमार, अलादीन, राजेश, राकेश, सत्यम, दीपिका राजपूत, फैसल उस्मानी, आदर्श, ब्रजेंद्र, प्रिया यादव, निशा, आदेश, अनुज, शिवानी कुशवाह, स्वेक्षा, दिव्या, सलोनी, राजेंद्र कौर, शिखा, कनिष्का, काव्य, अंशुल, प्रिंस, अमित ,पंकज सहित अन्य वॉलेंटियर्स की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाई। आयोजन समिति ने सभी के समर्पण और टीम भावना की विशेष सराहना की। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक डॉ अंकिता शर्मा, डॉ रानी शर्मा, डॉ संतोष कुमार, गोविंद यादव, कमलेश कुमार ,मुकेश कर्दम, आदि उपस्थित रहें।

