राजस्थान सरकार आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत पालनहार योजना से जुड़े छात्र-छात्राओं को कॉलेज और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थी आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़ें।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है। योजना के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए फीस प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाता है, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और छात्र अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
इस योजना की शुरुआत 19 जनवरी 2012 को की गई थी। तब से लेकर अब तक हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल चुका है। राज्य सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना का लाभ केवल उन छात्र-छात्राओं को दिया जाता है जो राजस्थान सरकार की पालनहार योजना के लाभार्थी हैं। पालनहार योजना के तहत अनाथ, अर्ध-अनाथ और अन्य पात्र श्रेणियों के बच्चों के पालन-पोषण एवं शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना इसी पहल का विस्तार है, जिसके माध्यम से ऐसे बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए अतिरिक्त सहयोग मिलता है।
योजना के तहत सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे विद्यार्थियों को फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों में राहत मिलती है। सरकार का मानना है कि शिक्षा ही बेहतर भविष्य की कुंजी है और किसी भी छात्र की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण बाधित नहीं होनी चाहिए।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का पालनहार योजना का लाभार्थी होना आवश्यक है। साथ ही उसकी न्यूनतम आयु 15 वर्ष होनी चाहिए और वह किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय या तकनीकी संस्थान में अध्ययनरत होना चाहिए। अधिकतम आयु 21 वर्ष या पाठ्यक्रम पूरा होने तक निर्धारित की गई है।
आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, पालनहार योजना से संबंधित प्रमाण पत्र, प्रवेश प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज, पासपोर्ट आकार का फोटो तथा अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र जमा करने होते हैं।
योजना के लिए आवेदन ऑफलाइन माध्यम से किया जाता है। इच्छुक विद्यार्थी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन पत्र को आवश्यक दस्तावेजों के साथ भरकर जिला स्तर पर उपनिदेशक या सहायक निदेशक कार्यालय में जमा करना होता है। विभाग के अनुसार, किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश लेने के तीन माह के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है। इससे पात्र विद्यार्थियों को समय पर योजना का लाभ मिल सकेगा और वे अपनी उच्च शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रख सकेंगे।

