- बिना HSRP नंबर प्लेट के सड़कों पर फर्राटा भर रहे डंपर, तीन स्कूलों के बच्चे धूल फांकने को मजबूर
- पानी के छिड़काव का नियम हवा में उड़ा, एआरटीओ बोले जांच कर की जाएगी सख्त कार्रवाई
Sitapur : जनपद में इन दिनों चल रहे खनन के कारोबार में परिवहन और पर्यावरण मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात दौड़ रहे भारी-भरकम डंपर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल बिना स्पष्ट एचएसआरपी (HSRP) नंबर प्लेट के, जिम्मेदार विभागों की आंखों के सामने धड़ल्ले से चल रहा है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्र के नौनिहालों और आम जनमानस के स्वास्थ्य के साथ भी सरेआम खिलवाड़ हो रहा है।
स्कूलों पर धूल का प्रहार, नंबर प्लेट से पहचान गायब
इस खनन मार्ग पर स्थित तीन प्रमुख शिक्षण संस्थानों आशा शिक्षा निकेतन, संत शास्त्री विद्याश्रम और डॉ. राम बक्श सिंह कन्या इंटर कॉलेज के पास स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। डंपरों के गुजरने से उड़ने वाले धूल और मिट्टी के गुबार के कारण इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बेहद परेशान हैं। आलम यह है कि बच्चे रोजाना इसी जहरीली धूल के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि "गांव में धूल का गुबार, बच्चों के भविष्य पर प्रहार" साबित हो रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पूर्व में भी जनता ब्रिक फील्ड और जगदीश एंड संस ब्रिक फील्ड द्वारा सड़कों को ध्वस्त करते हुए इसी तरह धूल-मिट्टी उड़ाई जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। वर्तमान में चल रहे डंपरों के डाले पर कुछ नंबर तो लिखे हैं, लेकिन उन पर इतनी धूल जमी है कि रजिस्ट्रेशन नंबर को पढ़ पाना नामुमकिन है। ग्रामीणों को डर है कि यदि इन अनियंत्रित वाहनों से कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो डंपर चालक आसानी से फरार हो जाएंगे और उनकी पहचान करना भी मुश्किल होगा।
हवा में उड़े सरकारी नियम, क्षतिग्रस्त हुआ संपर्क मार्ग
सरकारी दावों और नियमों के मुताबिक, स्वीकृत घाटा संख्या से डंपिंग स्थल तक धूल को दबाने के लिए नियमित रूप से वाटर टैंकरों से पानी का छिड़काव किया जाना अनिवार्य है, ताकि लोगों को सांस संबंधी बीमारियां न हों। इसके साथ ही ओवरलोडिंग पर सख्त नियंत्रण और सड़कों की क्षमता के अनुसार ही वाहन चलाने का प्रावधान है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके ठीक उलट है; सड़कों पर पानी की एक बूंद तक नहीं छिड़की जा रही, जिससे पूरी हवा प्रदूषित हो चुकी है। ओवरलोड डंपर सीतापुर-हरदोई संपर्क मार्ग पर इस कदर रफ्तार से दौड़ते हैं कि अन्य राहगीरों और वाहनों को साइड तक नहीं मिलती। इसके चलते यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
प्रशासन का मौन और सुरक्षा पर उठते सवाल
इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे स्थानीय पुलिस, परिवहन और खनन विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में है। जनता सवाल उठा रही है कि आखिर तय मानकों के विपरीत ये दर्जनों डंपर किसकी शह पर सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं? क्या विभाग नियमों का पालन कराने के लिए किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
इस पूरे संवेदनशील मामले में जब एआरटीओ सर्वेश चतुर्वेदी से बात की गई, तो उन्होंने विषय की गंभीरता को स्वीकार किया। एआरटीओ ने स्पष्ट कहा कि मामला बेहद गंभीर है। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी और मानकों का उल्लंघन करने वाले डंपर स्वामियों एवं संचालकों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

