- मुख्यमंत्री से शिकायत, न्यायिक निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्षता पर उठाए सवाल
- सरकारी भूमि पर धार्मिक निर्माण का आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग
- एसडीएम की सफाई नया मंदिर नहीं, पुराने मंदिर का हो रहा पुनर्निर्माण; वकीलों के आपसी विवाद का मामला
Lakhimpur Kher : तहसील गोला गोकर्णनाथ के न्यायालय परिसर में कथित मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बिहारी वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि न्यायालय परिसर में सरकारी भूमि पर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है, जो संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना, न्यायिक निष्पक्षता और सरकारी तटस्थता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य रुकवाने, उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए विस्तृत शिकायती पत्र में अधिवक्ता श्री वर्मा ने आरोप लगाया है कि तहसील गोला की उपजिलाधिकारी प्रतीक्षा त्रिपाठी द्वारा मंदिर निर्माण का भूमि पूजन कर न्यायालय प्रांगण के भीतर अदालत कक्ष के बेहद निकट धार्मिक निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि न्यायालय ऐसा संस्थान है जहां हर धर्म, जाति और समुदाय का व्यक्ति निष्पक्ष न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचता है। ऐसे में न्यायालय परिसर में किसी धार्मिक संरचना का निर्माण न्यायिक निष्पक्षता की छवि को प्रभावित कर सकता है और न्याय व्यवस्था की तटस्थता पर सवाल खड़े कर सकता है।
शिकायत में कहा गया है कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर आधारित है और राज्य के किसी भी अंग को किसी विशेष धर्म के पक्ष में खड़ा दिखाई नहीं देना चाहिए। अधिवक्ता वर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 27 का उल्लेख करते हुए कहा है कि सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक भूमि पर धार्मिक निर्माण को बढ़ावा देना संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी दावा किया है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर सरकारी भूमि और सार्वजनिक स्थलों पर अनधिकृत धार्मिक संरचनाओं के निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शिकायत में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी परिसरों में धार्मिक निर्माण राज्य की तटस्थता के सिद्धांत का उल्लंघन माना जा सकता है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सार्वजनिक और सरकारी भूमि पर धार्मिक अतिक्रमणों को लेकर दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।
अधिवक्ता ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि किसी भी लोक सेवक का पहला दायित्व संविधान और कानून के प्रति निष्ठा रखना है। यदि कोई अधिकारी अपने पद और अधिकारों का उपयोग किसी धार्मिक निर्माण को बढ़ावा देने में करता है, तो यह सरकारी सेवा आचरण नियमों की भावना के विपरीत है। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रकार के कदम भविष्य में सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव का कारण बन सकते हैं तथा प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर सकते हैं।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से न्यायालय परिसर में हो रहे कथित निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (नियुक्ति), राजस्व विभाग, मंडलायुक्त लखनऊ तथा जिलाधिकारी खीरी को भी भेजी गई है।
मामला सामने आने के बाद अधिवक्ता समुदाय और स्थानीय प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। न्यायालय परिसर से जुड़े इस विवाद ने कई कानूनी और प्रशासनिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ता लाल बिहारी वर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला स्तरीय ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वह उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में रिट याचिका प्रस्तुत करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
एसडीएम बोलीं- नया मंदिर नहीं, पुराने मंदिर का हो रहा पुनर्निर्माण
मामले में लगाए गए आरोपों पर उपजिलाधिकारी गोला प्रतीक्षा त्रिपाठी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि न्यायालय परिसर में कोई नया मंदिर नहीं बनाया जा रहा है। उनके अनुसार वहां पहले से मंदिर मौजूद था और वर्तमान में उसी का पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया जा रहा है।
एसडीएम ने बताया कि मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य अधिवक्ताओं की ओर से कराया जा रहा है और इसका प्रतिनिधित्व बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, अध्यक्ष और मंत्री सहित अन्य लोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के बीच आपसी मतभेद होने के कारण यह विवाद सामने आया है।
प्रतीक्षा त्रिपाठी ने कहा, “मंदिर पहले से बना हुआ था, नया मंदिर नहीं बनाया जा रहा है। वकीलों के बीच आपसी विरोध है, इसलिए इस तरह की बातें सामने आ रही हैं। मंदिर निर्माण का प्रतिनिधित्व बार के अध्यक्ष और मंत्री कर रहे हैं।”
मंदिर निर्माण के समय शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मंदिर में भंडारा और पूजा-पाठ का कार्यक्रम था। ऐसे आयोजन में जाना स्वाभाविक है। भंडारे में तो जाया ही जाएगा।”
फिलहाल शिकायत और प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामले से संबंधित जब जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी के सीयूजी नंबर पर फोन किया गया, तो बताया गया कि डीएम साहब प्रभारी मंत्री के साथ बैठक में व्यस्त हैं।

