- बीमारी से राहत की तलाश में निकले छात्र, अनुशासन के नाम पर पिटाई का आरोप
- एफआईआर के बाद जांच शुरू, सवाल-क्या शिक्षा संस्थानों में डंडा ही बचा है आखिरी तर्क
Maharajganj : शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में ज्ञान, संस्कार और संवेदनशीलता का विकास करना होता है, लेकिन निचलौल स्थित मदरसा अरबिया जीजिया मजहरूल ओलूम में सामने आए घटनाक्रम ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यहां आरोप है कि बीमारी के कारण दवा लेने जा रहे दो नाबालिग छात्रों की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने बंद गेट खुलवाने की हिम्मत कर ली। इसके बाद उन्हें किताबों का नहीं, डंडे का पाठ पढ़ा दिया गया।
पीड़ित छात्रों के अनुसार, रविवार को इंटरवल के दौरान एक छात्र पेट दर्द और दूसरा बुखार की दवा लेने मेडिकल स्टोर जा रहा था। सीढ़ी के गेट पर ताला लगा था, इसलिए दोनों ने चपरासी से गेट खोलने का अनुरोध किया। आरोप है कि यह बात शिक्षक मौलाना खालिद को नागवार गुजरी और उन्होंने दोनों छात्रों को कमरे में बुलाकर डंडे से पीट दिया। घायल छात्रों का इलाज सीएचसी निचलौल में कराया गया।एक छात्र के परिजनों ने बाद में शिकायत वापस ले ली, लेकिन दूसरे छात्र के दादा निजामुद्दीन की तहरीर पर निचलौल पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों का कहना है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने और उन्हें प्रताड़ित करने में बड़ा अंतर होता है। उनका आरोप है कि मदरसे में पहले भी मारपीट की शिकायतें सामने आती रही हैं।उधर, आरोपी शिक्षक ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। निचलौल के थानाध्यक्ष अंकित कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

