केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के विवादित 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' (OSM) टेंडर और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
मामले में बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है और जल्द ही कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से OSM सिस्टम से जुड़े पूरे टेंडर प्रोसेस की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय को अब तक दी गई सफाई से पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिली है, जिसके चलते अब जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि "मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
आरोप है कि OSM टेंडर प्रक्रिया के दौरान कई बार पात्रता मानकों और तकनीकी शर्तों में बदलाव किया गया। इसके बाद हैदराबाद स्थित कंपनी 'Coempt Edu Tek' को सफल बोलीदाता के रूप में चुने जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विपक्षी दलों और आलोचकों ने आशंका जताई है कि क्या किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में ढील दी गई। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान धुंधली उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्नों और तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आईं।
CBSE ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से वित्तीय नियमों और स्थापित खरीद प्रक्रियाओं के अनुसार की गई थी।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब एथिकल हैकर्स और स्वतंत्र डेवलपर्स ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी कमियों की ओर इशारा किया। इसके बाद OSM सिस्टम की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।

