मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने रविवार को अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनने के बाद उन्होंने पानी पीकर उपवास तोड़ा।
हालांकि अनशन समाप्त करने के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें छत्रपति संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल से रविवार को महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, विधायक प्रसाद लाड समेत अन्य अधिकारियों ने आंदोलनकारियों के साथ लंबी बातचीत की। बैठक में मराठा समाज की कई प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी, जिसके बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
सरकार ने माना 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड का आधार
बैठक के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने बताया कि सरकार ने 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही पहले से जारी प्रमाणपत्रों को वैधता प्रमाणपत्र देने का भी आश्वासन दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी पात्र व्यक्तियों को प्रमाणपत्र देने में लापरवाही करेगा या जानबूझकर देरी करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार जल्द ही इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करेगी।
सातारा गजेटियर पर सरकार को एक माह का समय
जरांगे पाटिल ने बताया कि सातारा गजेटियर लागू करने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई है। इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए सरकार को एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी।
इसके अलावा वैधता प्रमाणपत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी करने पर भी सहमति बनी है, जिससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
दो से तीन दिन में जारी होगा शासनादेश
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार मराठा समाज के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर सरकार पहले से काम कर रही थी, लेकिन कुछ मामलों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
उन्होंने कहा कि बैठक में बनी सहमति के आधार पर अगले दो से तीन दिनों के भीतर शासन निर्णय (जीआर) जारी कर अमल की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
वादा पूरा नहीं हुआ तो फिर होगा आंदोलन
हालांकि मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार को चेतावनी भी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि तय समय के भीतर शासन निर्णय जारी नहीं किया गया और वादों को लागू नहीं किया गया तो वह दोबारा आंदोलन और अनशन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सरकार के सकारात्मक आश्वासन पर भरोसा करते हुए फिलहाल आंदोलन स्थगित किया गया है, लेकिन समाज के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
भुजबल पर साधा निशाना
बैठक के दौरान मनोज जरांगे पाटिल ने बिना नाम लिए वरिष्ठ नेता छगन भुजबल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि कोई उन पर गलत आरोप लगा रहा है तो दोनों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
अनशन टूटते ही बिगड़ी तबीयत
कई दिनों तक लगातार अनशन पर रहने के कारण मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत अचानक खराब हो गई। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें तत्काल छत्रपति संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है और चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
मराठा आरक्षण आंदोलन के इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद फिलहाल आंदोलन स्थगित हो गया है, लेकिन अब सबकी निगाहें सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले शासन निर्णय पर टिकी हैं। यदि सरकार अपने वादों को समय पर पूरा करती है तो लंबे समय से चल रहा मराठा आरक्षण विवाद समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

