लखनऊ : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि में कथित चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दान राशि की गणना प्रक्रिया में तय सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही और कुछ बैंककर्मियों की संभावित भूमिका सामने आई है।
मामले में ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
गणना प्रक्रिया में नियमों में कथित ढील
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट की ओर से नकदी संकलन, गणना व्यवस्था और बैंक के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जांच में सामने आया है कि गणनाकर्मियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड, बायोमीट्रिक सत्यापन और तलाशी जैसे सुरक्षा नियमों में कथित रूप से ढील दी गई, जिससे अनियमितताओं की आशंका बढ़ी। एसआईटी इन पहलुओं की कानूनी जांच कर रही है।
चंपत राय ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने भी पूरे मामले में बैंक की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक की सलाह पर दान की गणना जमीन पर बैठकर करने के बजाय मेज-कुर्सियों पर शुरू की गई, जिससे चोरी की संभावना बढ़ी। घटना सामने आने के बाद पुरानी व्यवस्था दोबारा लागू कर दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंक के चेस्ट रूम में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों की कड़ी तलाशी, बिना जेब वाले कपड़ों का उपयोग और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं कराया गया। उनके अनुसार, गणनाकर्मियों को दिए गए कपड़ों में जेबें भी थीं, जो निर्धारित मानकों के विपरीत था।
एसआईटी को भेजा पत्र
चंपत राय ने एसआईटी को भेजे पत्र में अपने बयान को जांच का हिस्सा बनाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि 6 फरवरी 2025 को जारी गणना प्रक्रिया संबंधी दिशा-निर्देशों से वह सहमत नहीं थे। उनके मुताबिक, इस दस्तावेज पर ट्रस्ट की ओर से डॉ. अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के शाखा प्रबंधक के हस्ताक्षर थे, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी काफी बाद में मिली।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट और एसबीआई के बीच 9 फरवरी 2024 को हुए समझौते (एमओयू) में सीसीटीवी, लोहे की जाली वाले प्रवेश द्वार और अन्य सुरक्षा उपायों का स्पष्ट उल्लेख था। उनका सवाल है कि यदि ये प्रावधान मौजूद थे तो उनका पालन क्यों नहीं कराया गया।
40 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर
मामले में गिरफ्तार आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को अदालत ने 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड की अनुमति दी है। जांच अधिकारी ने सात दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने सीमित अवधि की अनुमति दी। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की जानकारी जुटा रही है।
जांच का दायरा बढ़ा
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल डेटा और बैंकिंग लेनदेन की जांच कर रही है। जांच का दायरा सराफा कारोबारियों और ट्रस्ट से जुड़े कुछ भूमि सौदों तक भी बढ़ाया गया है। विभिन्न बिंदुओं पर समानांतर जांच जारी है।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बयान
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि पूर्व महासचिव चंपत राय ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था, उनसे इस्तीफा नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि दानपात्र और गणना व्यवस्था का संचालन महासचिव के अधिकार क्षेत्र में था और चंपत राय को वह निर्दोष मानते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में एसआईटी की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही सभी आरोपों और जिम्मेदारियों की आधिकारिक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

