नई दिल्ली : रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव दो दिवसीय (2 और 3 अप्रैल 2026) महत्वपूर्ण भारत दौरे पर पहुंचे हैं। विश्व राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच मंटुरोव का यह दौरा भारत और रूस के सदाबहार रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
मंटुरोव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और एनएसए अजीत डोभाल के साथ गहन चर्चा की। इस दौरान व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते संघर्षों पर विस्तार से बात हुई।
व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी डील की तैयारी
विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, मंटुरोव और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के बीच 3 अप्रैल को दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। मंटुरोव भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के सह-अध्यक्ष भी हैं। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, उद्योग, ऊर्जा और उर्वरक के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर सहमति बनी। रूस भारत को रियायती दरों पर कच्चे तेल और उर्वरक की आपूर्ति जारी रखने के साथ-साथ कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश कर रहा है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष पर रूस-भारत की नजर
मुलाकात के दौरान केवल द्विपक्षीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि वैश्विक तनाव पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि हमने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया है। इसमें पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे उत्पन्न मानवीय संकट पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। रूस ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष साझा किया, जबकि भारत ने शांति और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपनी पुरानी नीति को दोहराया।
पीएम मोदी से मुलाकात और वार्षिक शिखर सम्मेलन की समीक्षा
इससे पहले, डेनिस मंटुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर पिछले साल दिसंबर में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के निर्णयों को लागू करने की प्रगति पर रिपोर्ट पेश की। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के साथ आर्थिक साझेदारी, तकनीक, नवाचार (Innovation) और लोगों के बीच आपसी संबंधों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मंटुरोव का यह दौरा पिछले शिखर सम्मेलन के फैसलों को जमीन पर उतारने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
क्या बोले विदेश मंत्री जयशंकर?
रूसी डिप्टी पीएम की मेजबानी करने के बाद डॉ. जयशंकर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमने द्विपक्षीय सहयोग पर गहन चर्चा की है। व्यापार, उद्योग, ऊर्जा और उर्वरक के साथ-साथ कनेक्टिविटी और मोबिलिटी पर हमारा विशेष ध्यान रहा। इसके अलावा नई तकनीकों और नवाचार में सहयोग के कई नए द्वार खुले हैं।” इस दौरे से यह स्पष्ट हो गया है कि पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत और रूस अपने सामरिक और आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

