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सहारा शहर लीज विवाद में सुप्रीम कोर्ट सख्त :  यूपी सरकार और नगर निगम को नोटिस, 31 जुलाई को अगली सुनवाई

सहारा शहर लीज विवाद में सुप्रीम कोर्ट सख्त : यूपी सरकार और नगर निगम को नोटिस, 31 जुलाई को अगली सुनवाई

Bhaskar Digital 2 weeks ago
  • सहारा शहर की लीज रद्द कर कब्जा लेने के मामले में सर्वोच्च अदालत ने मांगा जवाब
  • राज्य सरकार सहारा शहर की जमीन पर नई विधानसभा बनाने की योजना पर कर रही विचार

नई दिल्ली/लखनऊ। सहारा शहर की लीज रद्द कर जमीन का कब्जा लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और लखनऊ नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की है।

यह आदेश चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बाग्ची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मेसर्स सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर आयुक्त तथा नगर निगम के संपत्ति प्रभारी अधिकारी को नोटिस जारी किया। विपक्षी पक्षों की ओर से पेश अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को 31 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती

सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन ने अपनी याचिका में Allahabad High Court की लखनऊ खंडपीठ के 22 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सहारा की याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि चूंकि यह मामला सहारा-सेबी विवाद से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर सुनवाई का अधिकार सर्वोच्च अदालत के पास है। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया था।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, लखनऊ नगर निगम ने 8 सितंबर 2025 को जारी आदेश में सहारा शहर की उस जमीन की लीज रद्द कर दी थी, जो 22 अक्टूबर 1994 को सहारा समूह को दी गई थी। इसके बाद 11 सितंबर 2025 को एक अन्य आदेश जारी कर जमीन खाली कराने और उसका कब्जा वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

नगर निगम का कहना था कि लीज की शर्तों का पालन नहीं किया गया, जबकि सहारा समूह ने इस कार्रवाई को मनमाना और नियमों के विरुद्ध बताया है।

सहारा ने रखे ये तर्क

सहारा की ओर से अदालत में कहा गया कि 2 सितंबर 2017 को एक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) मामले में इस जमीन को लेकर उसके पक्ष में फैसला आ चुका था। कंपनी का दावा है कि नगर निगम ने उस आदेश की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से लीज निरस्त कर दी।

कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि वह लीज अवधि बढ़ाने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करने को तैयार थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी बात नहीं सुनी गई।

नई विधानसभा निर्माण की चर्चा

इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज है। सहारा शहर की जमीन का कब्जा वापस लेने के बाद राज्य सरकार यहां नई विधानसभा भवन के निर्माण की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

31 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और लखनऊ नगर निगम को अपना पक्ष रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी, जहां अदालत सभी पक्षों के जवाब और दस्तावेजों पर विचार करेगी। इस सुनवाई पर सहारा शहर की जमीन के भविष्य और उससे जुड़ी योजनाओं को लेकर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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