- बढ़ते हादसों की रोकथाम के लिए सरकार ने उठाया कदम
श्रावस्ती : स्कूली वाहन अब बिना फिटनेस के सड़क पर फर्राटा नहीं भर सकेंगे। 15 अप्रैल तक सभी स्कूली वाहनों के फिटनेस की जांच करवाना अनिवार्य हो गया है।
वाहनों की फिटनेस की अब लाइव निगरानी होगी। इसके लिए सरकार की ओर से पोर्टल लॉन्च किया गया है। बढ़ते हादसों की रोकथाम के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
एआरटीओ विनीत कुमार मिश्र ने बताया कि विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के सुरक्षित आवागमन के लिए संचालित स्कूली वाहनों में दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण वाहनों की फिटनेस का न होना अथवा गलत फिटनेस होना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में समय-समय पर चिंता व्यक्त की है। इसके बाद राज्य परिवहन विभाग ने स्कूलों में संचालित वाहनों के फिटनेस का आदेश जारी किया है। इसके लिए 1 से 15 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया गया है।
इस दौरान स्कूली वाहनों की फिटनेस एवं फिटनेस के सत्यापन के संबंध में विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही परिवहन विभाग द्वारा स्कूल वाहन निगरानी पोर्टल upisvmp.com बनाया गया है, जिसे 1 अप्रैल से “लाइव” कर दिया गया है। इसे Vahan/Sarthi पोर्टल के साथ इंटीग्रेशन और ई-चालान से जोड़ा गया है। एआरटीओ ने बताया कि नियम के उल्लंघन की स्थिति में स्कूल वाहन का विवरण कोड के माध्यम से मिल सकेगा।
यह पोर्टल विद्यालय परिवहन प्रणाली की निगरानी, सत्यापन एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में सहायक होगा। पोर्टल के सफल संचालन के लिए यह आवश्यक है कि विद्यालयों द्वारा पोर्टल पर वाहन का पंजीकरण नंबर, वाहन का प्रकार, वाहन कितने वर्ष पुराना है, इंजन मॉडल, चेसिस नंबर, वाहन स्वामी का विवरण, परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, जीपीएस और सीसीटीवी की जानकारी त्रुटिरहित अपलोड की जाए। इसके साथ ही इस आशय का स्टांप पेपर पर नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र भी पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
एआरटीओ ने बताया कि जिले के सभी स्कूल संचालक परिवहन विभाग कार्यालय में संपर्क कर वाहनों का डेटा upisvmp.com पोर्टल पर लाइव करा लें। किसी भी दशा में अनफिट वाहनों का संचालन कदापि न करें। किसी भी अप्रिय स्थिति की संपूर्ण जिम्मेदारी वाहन स्वामी की ही होगी।

