नई दिल्ली। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के 2019 में हुए उपचुनाव में भाजपा का टिकट देने की सिफारिश के लिए उप्र के सीएम योगी के फर्जी पत्र का इस्तेमाल करने वाले आरोपित को दोषी करार दिया है।
एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने आरोपित शिवाजी यादव को दोषी करार दिया। कोर्ट सजा की अवधि पर 20 अप्रैल को सुनवाई करेगा।
दरअसल, 2019 में लखनऊ कैंट विधानसभा के उपचुनाव के लिए शिवाजी यादव ने भाजपा टिकट देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फर्जी पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच में पाया कि ये पत्र योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को नहीं भेजा गया था। सीबीआई ने पाया कि इस पत्र में न तो मुख्यमंत्री के वास्तविक हस्ताक्षर थे और न ही ये उचित प्रकिया से भेजे गए थे।
सीबीआई के मुताबिक इस फर्जी पत्र पर अंकित तिथि, डिस्पैच नंबर और लिफाफे का विवरण सब पर आरोपित के हस्ताक्षर थे। फॉरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों ने इस फर्जीवाड़े की तस्दीक की। लिफाफे और पत्र में अंकित मोबाइल नंबर आरोपित के थे। इन मोबाइल नंबरों का लोकेशन डाटा निकाला गया जो जौनपुर के बदलापुर के थे। ये पत्र स्पीड पोस्ट से बदलापुर से ही प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया था।
कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि जो डिस्पैच नंबर लिफाफे पर दिया गया था, उस डिस्पैच नंबर से मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक पत्र विदेश मंत्रालय को जारी किया था। इसी डिस्पैच नंबर के जरिये आरोपित ने फर्जी पत्र बनाया, ताकि लगे कि ये असली पत्र है। कोर्ट ने आरोपित की ये दलील खारिज कर दी कि उसे झूठे केस में फंसाया गया है।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कोशिश संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के दफ्तरों के दुरुपयोग का मामला है। कोर्ट ने शिवाजी यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 465 और 471 के तहत दोषी करार दिया।
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