Ghaziabad : गाजियाबाद के खोड़ा में हुए बहुचर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड में पीड़ित मां सरोज की एक और बड़ी इच्छा जल्द ही पूरी होने जा रही है। मुख्य आरोपी और 50 हजार के इनामी असद को पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में ढेर करने के बाद अब प्रशासन ने उसके अवैध साम्राज्य पर कड़ा प्रहार किया है।
रोती-बिलखती मां की मांग पर त्वरित एक्शन लेते हुए उप जिलाधिकारी (SDM) ने असद के मकान पर बेदखली का सरकारी नोटिस चस्पा कर दिया है। रविवार को प्रशासनिक टीम ने बकायदा ढोल बजवाकर और लाउडस्पीकर से पूरे इलाके में मुनादी कराई कि 15 दिन के भीतर इस अवैध कब्जे को हटा लिया जाए, वरना मियाद पूरी होते ही बाबा का बुलडोजर इस मकान को जमींदोज कर देगा।
रोती मां ने कहा था- घर का इकलौता चिराग बुझाया, अब घर पर चले बुलडोजर
बीती 28 मई (ईद के दिन) को नवनीत विहार में सरेराह चाकू से गोदकर सूर्या चौहान की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद सूर्या की मां सरोज का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने आक्रोश और भारी गम के बीच प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा था, “उन्होंने मेरे घर का इकलौता चिराग बुझा दिया, मेरे बेटे के हत्यारों के घरों पर बुलडोजर चलना चाहिए।”
प्रशासन ने इस मांग पर कानूनी शिकंजा कसते हुए नवनीत विहार स्थित असद के मकान पर नोटिस चिपका दिया है। मुनादी के दौरान लाउडस्पीकर से पूरे इलाके को अल्टीमेटम दिया गया है कि आरोपी पक्ष के पास अपनी अवैध संपत्ति खाली करने के लिए सिर्फ 15 दिन का वक्त है, इसके बाद प्रशासन का बुलडोजर अवैध निर्माण को ढहा देगा।
महज 30 मिनट में कत्ल, पर रंजिश थी महीनों पुरानी
शुरुआती जांच में पुलिस को यह मामला महज एक ‘बाइक विवाद’ का लग रहा था। वारदात वाले दिन दोपहर करीब 3:00 बजे रास्ते में बाइक आमने-सामने आ जाने को लेकर असद और सूर्या के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसे स्थानीय लोगों ने शांत करा दिया था। लेकिन यह सुलह सिर्फ एक ढोंग थी। महज आधे घंटे बाद, यानी दोपहर 3:30 बजे, असद ने अपने पिता नवाब और दोस्तों के साथ मिलकर नवनीत विहार की गली नंबर-4 में सूर्या को घेर लिया। दोस्त फरहान ने असद को चाकू थमाया और पिता ने उकसाते हुए चिल्लाकर कहा- ‘आज इसकी कहानी खत्म कर दे।’ पिता की शह मिलते ही असद ने सूर्या के पेट में ताबड़तोड़ चाकू घोंप दिए थे। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान सूर्या ने दम तोड़ दिया था।
हत्या के पीछे की असली वजह: ऊपरी तौर पर यह कत्ल भले ही आधे घंटे पहले हुए बाइक विवाद का नतीजा दिख रहा हो, लेकिन इसके पीछे प्रेम प्रसंग और अवैध संबंधों की एक पुरानी रंजिश थी। सूर्या चौहान के संबंध मुख्य आरोपी असद की सगी बहन के साथ थे। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में पहले भी कई बार गंभीर झगड़े हो चुके थे। इसी वजह से करीब 8 महीने पहले असद के परिवार ने अपना घर भी बदल लिया था, लेकिन सूर्या ने वहां भी चक्कर काटना बंद नहीं किया था। असद के परिवार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर सूर्या की जान ले ली।
भारी सुरक्षा के बीच गोपनीय तरीके से दफनाया गया है असद का शव
पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका मुख्य आरोपी असद अब मिट्टी में मिल चुका है। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था और सख्त शर्तों के बीच असद का शव उसके परिजनों (चाचा) को सौंपा था। कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी में बेहद गोपनीय तरीके से उसका दफीना (अंतिम संस्कार) कराया गया। सुरक्षा कारणों से पुलिस अधिकारियों ने उस कब्रिस्तान के नाम का खुलासा करने से साफ मना कर दिया है, जहां असद को सुपुर्द-ए-खाक किया गया है।
मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर और उसके पिता नवाब सहित तीन आरोपियों के जेल जाने के बाद, अब प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई की शुरुआत से पीड़ित परिवार को कुछ इंसाफ मिलता नजर आ रहा है।

