अधिल शेट्टी, CEO, बैंकबाजार
आजकल ट्रैवल लोन लंबे समय के बजाय छोटे और लचीले होते जा रहे हैं। पहले लोग घूमने-फिरने के लिए बड़ा कर्ज लेते थे, लेकिन अब खासकर युवा ग्राहक छोटी अवधि वाले लोन, आसान किस्तों और डिजिटल मंजूरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
भारत का विदेश यात्रा खर्च 2024 में करीब 35 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े ट्रैवल मार्केट्स में शामिल हो गया है। वहीं, बैंकों और फिनटेक कंपनियों को ₹1 लाख से ₹3 लाख तक के छोटे ट्रैवल लोन की मांग तेजी से बढ़ती दिख रही है। अब लोग लंबे समय तक कर्ज में रहने के बजाय अपनी महीने की आय और खर्च के हिसाब से छोटे-छोटे लोन लेना पसंद कर रहे हैं। बिना अतिरिक्त ब्याज वाली EMI, "अभी घूमो बाद में भुगतान करो" और 6 से 24 महीने की चुकाने की अवधि जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने इस चलन को और मजबूत किया है क्योंकि वहां बिना कागजी प्रक्रिया, तुरंत मंजूरी और आसान लोन वितरण की सुविधा मिलती है। हालांकि बिना गारंटी वाले कर्ज को लेकर नियामक सतर्कता बनी हुई है, फिर भी उपभोक्ता खर्च आधारित रिटेल कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि ट्रैवल फाइनेंसिंग अब बड़े और लंबे लोन की जगह छोटे, लचीले और जरूरत के हिसाब से लिए जाने वाले कर्ज की ओर बढ़ रही है। – अधिल शेट्टी, CEO, बैंकबाजार

