तेहरान : मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर सवालिया निशान लग गए हैं, जिनमें उन्होंने ईरान की सैन्य कमर तोड़ने की बात कही थी।
एक ताजा अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि हफ्तों तक चले भीषण हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक बरकरार है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने सुरंगों और गुफाओं के अपने गुप्त नेटवर्क का इस्तेमाल कर अपने हथियारों के बड़े हिस्से को सुरक्षित बचा लिया है।
सुरंगों और गुफाओं में छिपा है ‘मौत का सामान’
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के बावजूद तेहरान के पास मौजूद मिसाइल लॉन्चरों में से लगभग आधे अभी भी सुरक्षित हैं। सूत्रों का कहना है कि ईरान ने सालों से अपनी मिसाइलों और ड्रोनों को जमीन के नीचे बने विशाल सुरंगों और गुफाओं के जाल में छिपा रखा है। यही कारण है कि आधुनिक सैटेलाइट और टोही विमानों के लिए भी इन ठिकानों को सटीक निशाना बनाना नामुमकिन साबित हो रहा है।
हजारों ड्रोन और क्रूज मिसाइलें अब भी तैनात
सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने चेतावनी दी है कि ईरान अभी भी पूरे क्षेत्र में बड़ी तबाही मचाने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के शस्त्रागार में अभी भी हजारों आत्मघाती ड्रोन और क्रूज मिसाइलें मौजूद हैं। विशेष रूप से, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण रखने वाली मिसाइलें अब भी पूरी तरह सक्रिय हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
नौसैनिक ताकत: छोटी नौकाएं बन रही हैं सिरदर्द
हालांकि हमलों में ईरान के बड़े नौसैनिक जहाज काफी हद तक नष्ट हो गए हैं, लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसैनिक इकाई ने अपनी 50% क्षमता बचा ली है। रिपोर्ट बताती है कि उनके पास अभी भी सैकड़ों छोटी नौकाएं और मानव रहित पोत (Unmanned Vessels) मौजूद हैं। ये छोटी और तेज रफ्तार नौकाएं खाड़ी में अमेरिकी बेड़े और व्यापारिक जहाजों के लिए ‘गुरिल्ला वारफेयर’ जैसा खतरा पैदा कर रही हैं।
ट्रंप की समय-सीमा पर उठे सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सैन्य अभियानों को पूरा करने के लिए दो से तीन सप्ताह की समय-सीमा तय की थी। लेकिन खुफिया आकलनों की समीक्षा करने वाले विशेषज्ञों ने इस डेडलाइन को पूरी तरह से ‘अवास्तविक’ बताया है। जमीनी हकीकत यह है कि इस्राइल और खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैनिक अभी भी ईरान की ओर से होने वाले नियमित मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह कहना कि ईरान की सैन्य शक्ति खत्म हो गई है, जल्दबाजी होगी।

