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'तुम मेरी मार्कशीट जला सकते हो', राहुल गांधी से हिमंता बिस्वा सरमा ने क्यों ऐसा कहा था?

'तुम मेरी मार्कशीट जला सकते हो', राहुल गांधी से हिमंता बिस्वा सरमा ने क्यों ऐसा कहा था?

Bhaskar Digital 1 month ago

Assam Election 2026 : असम में आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो चुका है। इसी बीच, प्रदेश के वरिष्ठ नेता हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है।

ताजा विवाद में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि हिमंता बिस्वा की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

इसी बीच, हिमंता बिस्वा का एक पुराना बयान भी चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि, “आप मेरी मार्कशीट जला सकते हैं, मुझे इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।” यह बयान तब का है जब हिमंता बिस्वा राहुल महंता के साथ एक हॉस्टल में रह रहे थे। उस समय के छात्र जीवन के अनुभवों को याद करते हुए हिमंता बिस्वा ने बताया कि, “राहुल से मेरी बातचीत में मैंने कहा था कि मेरी मार्कशीट जला दीजिए, मुझे इसकी जरूरत नहीं है।”

दरअसल, हिमंता बिस्वा और राहुल महंता एक ही हॉस्टल में रहते थे। जहां ज्यादातर छात्र अपने एकेडमिक नतीजों और भविष्य की योजनाओं को लेकर चिंतित रहते थे, वहीं हिमंता बिस्वा का मकसद स्पष्ट था कि उन्हें राजनीति में आना है। उनके लिए, मार्कशीट नौकरी पाने का माध्यम नहीं बल्कि यह एक औपचारिकता थी, क्योंकि उनका लक्ष्य पहले से ही राजनीति में करियर बनाने का था।

हिमंता बिस्वा के जीवन का उद्देश्य शुरू से स्पष्ट था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन से की, जहां वह एक सक्रिय छात्र नेता के रूप में उभरे। इस शुरुआती जुड़ाव ने उनके राजनीतिक रास्ते को मजबूत किया और उन्हें आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया।

हिमंता बिस्वा का राजनीतिक करियर शुरू में कांग्रेस के साथ रहा। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में धीरे-धीरे अपनी पकड़ बनाई और कई अहम मंत्रालयों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त की जिम्मेदारी संभाली। लेकिन, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के साथ मतभेदों के चलते उनका करियर एक मोड़ पर आ पहुंचा।

वर्ष 2015 में, हिमंता बिस्वा ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस निर्णय ने असम की राजनीति में भूचाल ला दिया। उनके इस कदम के बाद, वे पूर्वोत्तर में बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बनकर उभरे।

1996 के चुनाव में जालुकबारी से हार का सामना करने के बाद, हिमंता बिस्वा ने 2001 में जोरदार वापसी की। उसके बाद से उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र से लगातार जीत हासिल की है। पांच साल तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा देने के बाद, हिमंता बिस्वा अब 2026 के विधानसभा चुनाव में एक और कार्यकाल की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि फिर से राज्य की बागडोर संभाल सकें।

यह चुनावी माहौल और नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग, असम की राजनीति को काफी गर्म बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव राज्य के भविष्य का निर्धारण कर सकता है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों और आरोपों के साथ मैदान में हैं।

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